Ather Energy के शेयरों में आज शानदार तेजी देखी गई और यह 52-हफ्ते के नए हाई पर पहुंच गया। वजह है दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026 का ऐलान। इस पॉलिसी में **₹15,000 करोड़** का बड़ा निवेश शामिल है और इसका लक्ष्य **2028** तक दिल्ली में पेट्रोल और CNG वाली टू-व्हीलर्स को पूरी तरह बंद करना है। EV कंपनियों के लिए जहां यह अच्छी खबर है, वहीं कुछ पुरानी ऑटो कंपनियों के शेयर दबाव में दिखे।
क्या हुआ है?
दिल्ली कैबिनेट ने आखिरकार दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। इस पॉलिसी का मकसद अगले चार सालों में ₹15,000 करोड़ के निवेश के साथ दिल्ली को जीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट का हब बनाना है। पॉलिसी की सबसे खास बात यह है कि यह पुराने पेट्रोल और CNG वाहनों को तेजी से बाहर करने की योजना बना रही है। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा ही रजिस्टर होंगे। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से पेट्रोल और CNG वाली नई टू-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा, और सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ही मान्य होंगी।
Ather Energy और ऑटो स्टॉक्स पर असर
इस ऐलान के बाद Ather Energy के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई और स्टॉक 52-हफ्ते की नई ऊंचाई पर पहुंच गया। बाजार इस पॉलिसी को दिल्ली जैसे बड़े शहर में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को अपनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के तौर पर देख रहा है। पॉलिसी के तहत पहले साल में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर ₹30,000 तक की सब्सिडी भी मिलेगी। इस वजह से अन्य EV-लिंक्ड स्टॉक्स में भी हलचल देखी गई।
हालांकि, पूरे ऑटो सेक्टर में एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं रही। Eicher Motors, जो Royal Enfield की पैरेंट कंपनी है, के शेयर में गिरावट आई। निवेशकों को चिंता है कि कंपनी का इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल पोर्टफोलियो अभी काफी छोटा है। यह अलग-अलग प्रदर्शन दिखाता है कि कैसे बाजार अब उन कंपनियों को पहचान रहा है जो EV के लिए तैयार हैं और कौन सी कंपनियां अभी भी पारंपरिक इंजन वाली टेक्नोलॉजी पर ज्यादा निर्भर हैं।
निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
दिल्ली EV पॉलिसी 2026 सिर्फ सब्सिडी देने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह एक रेगुलेटरी आदेश है जो राजधानी में काम करने वाले ऑटोमेकर्स को अपने प्रोडक्ट मिक्स को बदलने पर मजबूर करेगा। ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ करने और डायरेक्ट परचेज सब्सिडी देने से ग्राहकों के लिए EV खरीदना सस्ता हो जाएगा। ₹15,000 करोड़ के निवेश का उद्देश्य चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना है, जिसमें 30,000 से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट लगाने का प्रस्ताव है। यह EV अपनाने में आने वाली सबसे बड़ी बाधाओं में से एक को दूर करेगा।
जोखिम और बाजार की असलियत
हालांकि, यह पॉलिसी EV इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा बूस्ट है, लेकिन कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। इस तरह की आक्रामक फेज-आउट योजना का सफल होना पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के समय पर निर्माण और सरकार की निवेश योजना को लागू करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, EV निर्माताओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अगर कंपनियां दिल्ली में मार्केट शेयर के लिए आक्रामक डिस्काउंट देती हैं, तो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। साथ ही, यह पॉलिसी मौजूदा पेट्रोल और CNG वाहनों को प्रभावित नहीं करती है, जिसका मतलब है कि पुराने वाहनों के धीरे-धीरे हटने के कारण यह बदलाव धीरे-धीरे होगा।
आगे निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के असल rollout पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह इस पॉलिसी की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। प्रमुख ऑटोमेकर्स की ओर से EV के नए लॉन्च टाइमलाइन और क्षमता विस्तार को लेकर मैनेजमेंट की टिप्पणी भी एक अहम निगरानी बिंदु होगी। अंत में, अन्य राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया - क्या वे इसी तरह के नियम अपनाते हैं - यह तय कर सकती है कि क्या यह पॉलिसी पूरे भारत के लिए एक बेंचमार्क बनेगी।
