Ather Energy के CEO, तरुण मेहता, ने सरकार से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) स्टार्टअप्स को ऑटोमोटिव प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम में शामिल करने के लिए नियमों में बदलाव की मांग की है। मेहता ने **₹1 लाख करोड़** के नए RDI फंड की तारीफ की, लेकिन यह भी बताया कि मौजूदा PLI नियमों के चलते ऐसी कंपनियाँ बाहर रह जाती हैं जो शुरुआती दौर से आगे तो बढ़ गई हैं, लेकिन **₹10,000 करोड़** के रेवेन्यू थ्रेशोल्ड तक नहीं पहुंची हैं।
Detailed Coverage
Ather Energy के को-फाउंडर और CEO, तरुण मेहता, ने हाल ही में भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) स्टार्टअप्स के सामने आ रही एक बड़ी पॉलिसी बाधा पर प्रकाश डाला। 'राइजिंग भारत समिट' में बोलते हुए मेहता ने तर्क दिया कि मौजूदा ऑटोमोटिव प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम में एक स्ट्रक्चरल खामी है, जिसके कारण कई इनोवेटिव EV कंपनियाँ सरकारी सहायता से वंचित रह जाती हैं।
मौजूदा PLI थ्रेशोल्ड्स बनाते हैं बाधा
इस समस्या का मूल ऑटोमोटिव PLI स्कीम के लिए पात्रता मानदंड में निहित है। मेहता के अनुसार, मौजूदा दिशानिर्देश दो चरम सीमाओं के बीच बंटे हुए हैं, जिससे मध्य-आकार के बढ़ते स्टार्टअप मुश्किल स्थिति में आ जाते हैं। स्कीम प्रभावी रूप से एक कंपनी से या तो शून्य रेवेन्यू वाली एक बिल्कुल नई इकाई होने की अपेक्षा करती है, या फिर ₹10,000 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू वाली एक स्थापित फर्म होने की। चूँकि व्यावसायिक रूप से सक्रिय अधिकांश EV स्टार्टअप इन दोनों बिंदुओं के बीच कहीं आते हैं, वे इस प्रोग्राम के लिए अयोग्य बने रहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि PLI स्कीम लगभग 16% कैशबैक का वित्तीय लाभ प्रदान करती है, जो कंपनियों को रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग की भारी लागतों की भरपाई करने में काफी मदद करता है।
RDI फंड एक सकारात्मक कदम
PLI स्कीम में कमियों को उजागर करते हुए, मेहता ने भारतीय सरकार के ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) फंड की प्रशंसा की, जिसे नवंबर 2025 में लॉन्च किया गया था। उन्होंने इसे डीपटेक और हार्डवेयर इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी सफलता बताया। Ather Energy ने इस फंड का उपयोग कम-ब्याज वाले लोन के जरिए किया है, जिसका इस्तेमाल कंपनी अपने रिसर्च और डेवलपमेंट लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए कर रही है। यह फंड लंबी अवधि के फाइनेंसिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी जटिल तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने वाली कंपनियों के लिए आवश्यक है।
निवेशकों का नजरिया और बाजार पर असर
निवेशकों के लिए, इन दोनों सरकारी पहलों के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है। जबकि RDI फंड इनोवेशन के लिए पूंजी प्रदान करता है, ऑटोमोटिव PLI स्कीम सीधे मैन्युफैक्चरिंग वॉल्यूम और पैमाने से जुड़ी है। PLI लाभों से बाहर रहने का मतलब है कि कंपनियाँ बड़े, पुराने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अपनी लागत संरचना को कम करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं, जो रेवेन्यू की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। यदि सरकार इन मानदंडों को समायोजित करने का निर्णय लेती है ताकि सक्रिय स्टार्टअप्स को शामिल किया जा सके, तो यह Ather Energy जैसी फर्मों के लिए वित्तीय लचीलापन और लाभ मार्जिन में सुधार कर सकता है। निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या भारी उद्योग मंत्रालय या संबंधित सरकारी निकाय इन PLI थ्रेशोल्ड्स के संबंध में किसी नीतिगत संशोधन या परामर्श की घोषणा करते हैं, क्योंकि इससे भारत में नए EV खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य बदल सकता है।
