Commercial vehicle maker Ashok Leyland ने दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के खिलाफ अपने लंबे विवाद में **₹222.65 करोड़** का आंशिक आर्बिट्रल अवार्ड जीत लिया है। यह फैसला 2009-2011 के दौरान बस सप्लाई से जुड़े भुगतान विवाद को सुलझाता है।
अशोक लेलैंड ने DTC के खिलाफ जीता केस
Commercial vehicle maker Ashok Leyland के लिए अच्छी खबर आई है। कंपनी को दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के खिलाफ चल रहे एक पुराने मामले में आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल से ₹222.65 करोड़ का आंशिक अवार्ड मिला है। यह फैसला 2009 से 2011 के बीच हुई बस सप्लाई से जुड़े पेमेंट डिस्प्यूट पर आया है। कंपनी ने 2013 में ही आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की थी।
फैसले का वित्तीय प्रभाव
इस अवार्ड के तहत DTC को प्रिंसिपल अमाउंट ₹222.65 करोड़ के साथ 10% सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज केस शुरू होने से लेकर फाइनल सेटलमेंट तक कैलकुलेट किया जाएगा। इसके अलावा, अशोक लेलैंड को ₹2.96 करोड़ का लीगल खर्चा भी मिलेगा। ट्रिब्यूनल ने DTC द्वारा दायर ₹136 करोड़ का काउंटरक्लेम भी खारिज कर दिया है, जिससे कंपनी पर संभावित देनदारी का खतरा टल गया है।
कंपनी ने मूल कॉन्ट्रैक्ट को लेकर कुल ₹445 करोड़ का क्लेम किया था। हालांकि, अभी कंपनी इस फैसले की समीक्षा कर रही है कि बाकी क्लेम पर क्या रुख अपनाया जाए। निवेशकों के लिए यह रिकवरी एक अहम डेवलपमेंट है, क्योंकि इससे पेंडिंग लीगल एसेट को कैश इनफ्लो में बदलने में मदद मिलेगी।
आगे क्या?
भारत में ऑटो सेक्टर में अक्सर सरकारी और म्युनिसिपल टेंडर्स से जुड़े पेमेंट साइकिल्स और कॉन्ट्रैक्ट एग्जीक्यूशन में दिक्कतें आती हैं। अशोक लेलैंड मैनेजमेंट अब अवार्ड की डिटेल्स को वेरिफाई कर रहा है ताकि ब्याज सहित फाइनल अमाउंट कैलकुलेट किया जा सके। निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि DTC से यह पैसा असल में कब तक मिलता है, क्योंकि पब्लिक सेक्टर एंटिटीज के साथ लीगल मामलों में आगे भी अपील या एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस हो सकती है।
