Ashok Leyland के शेयर आज **2.13%** बढ़कर **₹161.45** पर पहुंच गए। कंपनी ने मार्च 2026 तिमाही में **56.97%** की शानदार ग्रोथ के साथ **₹1,346.73 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, तिमाही रेवेन्यू में **16.29%** की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन निवेशकों का ध्यान सालाना मुनाफे में मामूली बढ़त और हाल ही में कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट ज्वाइंट वेंचर के बंद होने पर भी है।
शुक्रवार की सुबह अशोक लेलैंड के शेयरों में 2.13% का उछाल देखा गया और भाव ₹161.45 पर पहुंच गया। कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। यह कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी Nifty Midcap 150 का हिस्सा है और इसने मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में अपने प्रदर्शन में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है।
तिमाही नतीजे: मुनाफे और रेवेन्यू में शानदार ग्रोथ
चौथी तिमाही में, कंपनी ने ₹17,246.44 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 16.29% अधिक है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 56.97% की बड़ी छलांग लगाई गई, जो ₹857.99 करोड़ से बढ़कर ₹1,346.73 करोड़ हो गया। इस बॉटम-लाइन ग्रोथ के चलते कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹1.38 से बढ़कर ₹2.20 हो गया।
सालाना प्रदर्शन और EPS में गिरावट
वहीं, मार्च 2026 को समाप्त पूरे फाइनेंशियल ईयर की बात करें तो कंपनी ने ₹56,362.08 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया, जो पिछले साल के ₹48,535.14 करोड़ की तुलना में 16.13% ज्यादा है। हालांकि, सालाना नेट प्रॉफिट में 9.49% की मामूली बढ़त के साथ यह ₹3,669.36 करोड़ रहा। दिलचस्प बात यह है कि पूरे साल के लिए रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 24.37% रहा, लेकिन सालाना EPS पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹10.58 की तुलना में घटकर ₹5.91 रह गया। तिमाही नतीजों की चमक और सालाना EPS में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए एक अहम बिंदु है जिस पर वे कंपनी की लंबी अवधि की अर्निंग क्षमता का आकलन करेंगे।
हालिया कॉर्पोरेट डेवलपमेंट
हालिया कॉर्पोरेट एक्शन्स ने भी निवेशकों की भावना को प्रभावित किया है। मई 2026 में, कंपनी ने ₹2.50 प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) घोषित किया था, इससे पहले मई 2025 में 1:1 के बोनस इश्यू की घोषणा की गई थी। इसके अलावा, कंपनी ने 27 जुलाई, 2026 को अपनी एसोसिएट कंपनी, अशोक लेलैंड जॉन डीरे कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, के स्वैच्छिक लिक्विडेशन (voluntary liquidation) को पूरा कर लिया है। कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेगमेंट से यह बाहर निकलना कंपनी के कैपिटल एलोकेशन में बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि वह अपने मुख्य कमर्शियल व्हीकल बिजनेस पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है।
आगे बढ़ते हुए, शेयरधारक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि क्या मार्च तिमाही की मजबूत तेजी भारतीय ऑटो सेक्टर के प्रतिस्पर्धी माहौल में बनी रह सकती है। भविष्य में कंपनी के कर्ज के स्तर और ज्वाइंट वेंचर के बंद होने के बैलेंस शीट पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े अपडेट्स, आने वाली तिमाहियों में कंपनी के कैपिटल मैनेजमेंट के प्रमुख संकेतक होंगे।
