Apollo Tyres ने अपने भविष्य के लिए एक बड़ी रणनीति बनाई है, जिसमें भारत में भारी निवेश और यूरोप में ऑपरेशनल रीस्ट्रक्चरिंग (Operational Restructuring) शामिल है। इस कदम का मकसद जहां भारत में ग्रोथ को भुनाना है, वहीं कम मुनाफे वाले यूरोपीय वेंचर्स से बाहर निकलकर प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) बढ़ाना है। लेकिन, इस बीच कंपनी पर लागत का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।
कंपनी अपने कुल ₹3,500 करोड़ के एक्सपेंशन प्लान का करीब 80% भारत में लगाने की तैयारी में है। India को कंपनी अपना मुख्य ग्रोथ इंजन मान रही है। Apollo Tyres ने भारत में अपना पिछला क्वार्टर रिकॉर्डतोड़ रहा, जहां स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Standalone Revenue) 14.3% बढ़ा और EBITDA मार्जिन 14.6% पर पहुंच गया।
घरेलू बाजार की इस मजबूती को नेचुरल रबर (Natural Rubber) की कीमतों में आई भारी उछाल से सीधी चुनौती मिल रही है। कच्चे माल (Raw Material) की कीमत ₹200 प्रति किलो से बढ़कर ₹250 प्रति किलो तक पहुंच गई है। मैनेजमेंट का मानना है कि इन बढ़ती इनपुट कॉस्ट (Input Costs) को मैनेज करने के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। भारत में पहले ही 6-8% और यूरोप में 2% की बढ़ोतरी की जा चुकी है, लेकिन लागत अनुमान से मिड- से हाई-टीन्स तक बढ़ सकती है।
यूरोप में मुनाफे को बेहतर बनाने के लिए, नीदरलैंड्स के एन्शेडे (Enschede) प्लांट को 30 जून तक बंद करने की योजना है। इस फैसले से कंपनी को €43 मिलियन का नॉन-कैश राइट-ऑफ (Non-cash write-off) और करीब €50 मिलियन का कैश खर्च आएगा। इसके फायदे FY27 की दूसरी छमाही में दिखने की उम्मीद है। यूरोप में EBITDA मार्जिन 14.6% रहे हैं, जो कंपनी के 16% से ऊपर के लक्ष्य से कम हैं।
भारतीय टायर इंडस्ट्री में FY26 तक 6-8% की ग्रोथ का अनुमान है, जो रिप्लेसमेंट डिमांड (Replacement Demand) और GST में संभावित बदलावों से प्रेरित है। वहीं, यूरोप में इन्फ्लेशन (Inflation) और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण 2030 तक केवल 1-3% की मामूली ग्रोथ देखने की उम्मीद है। Apollo Tyres का मार्केट कैप (Market Capitalization) करीब ₹25,000 करोड़ और P/E रेश्यो (P/E Ratio) 18.26x है, जो JK Tyre (15.76x), CEAT (19.11x) और MRF (24.7x) जैसी कंपनियों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव रेंज में है।
कंपनी ने अपना कर्ज (Debt) काफी कम किया है, नेट डेट (Net Debt) अब EBITDA का 0.4 गुना है। हालांकि, बड़ा कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) खर्चों को सावधानी से मैनेज करना होगा ताकि कर्ज दोबारा न बढ़े। कंपनी के लिए सबसे बड़ा रिस्क कच्चे माल, खासकर नेचुरल रबर की लगातार बढ़ती कीमतें हैं। मिडिल ईस्ट (Middle East) के टेंशन से क्रूड ऑयल (Crude Oil) और फ्रेट कॉस्ट (Freight Costs) में भी उतार-चढ़ाव का खतरा है।
इन चुनौतियों के बावजूद, एनालिस्ट्स (Analysts) सावधानी से पॉजिटिव दिख रहे हैं। आम सहमति 'Buy' रेटिंग की है, जिसमें प्राइस टारगेट (Price Target) ₹510-₹540 के बीच है। Citi ने ₹540 का टारगेट दिया है। हालांकि, मार्जिन पर चिंता के कारण कुछ ब्रोकरेज (Brokerages) ने EBITDA फोरकास्ट (EBITDA Forecasts) कम किए हैं। मैनेजमेंट का भरोसा मजबूत बैलेंस शीट (Balance Sheet) और फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) पर टिका है, लेकिन विस्तार की सफलता प्रभावी लागत नियंत्रण और ग्राहकों द्वारा कीमतों को स्वीकार करने पर निर्भर करेगी।