Amazon की ऑटोनॉमस यूनिट Zoox ने अटलांटा में अपनी टेस्टिंग रोक दी है। कंपनी के खिलाफ OSHA की जांच शुरू हुई है, जिसमें कर्मचारियों की सेहत और जहरीली गैस के रिसाव जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
Amazon की स्वायत्त वाहन (Autonomous Vehicle) कंपनी Zoox फिलहाल एक बड़े विवाद में घिर गई है। अमेरिका के फेडरल सेफ्टी रेगुलेटर, OSHA (Occupational Safety and Health Administration) ने एक जांच शुरू की है, जिसके बाद कंपनी को अटलांटा में अपनी टेस्टिंग गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। यह कदम तब उठाया गया जब कई टेस्ट ड्राइवर्स और स्टाफ मेंबर्स ने सांस लेने में तकलीफ और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की, जिसके पीछे वाहनों के अंदर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसों का रिसाव होने की आशंका जताई जा रही है।
वाहनों में गड़बड़ी और सुरक्षा के जोखिम
समस्या की जड़ Zoox के टेस्टिंग फ्लीट की बनावट में है। हालांकि कंपनी अपने खास इलेक्ट्रिक रोबोटैक्सी पर काम कर रही है, लेकिन वर्तमान में वे टेस्टिंग के लिए Toyota Highlander SUV का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन गाड़ियों को एडवांस्ड सेंसर और कंप्यूटिंग हार्डवेयर लगाने के लिए काफी मॉडिफाई किया गया है। माना जा रहा है कि इन बदलावों के चलते गाड़ियों की सीलिंग प्रभावित हुई, जिससे एग्जॉस्ट गैस का रिसाव केबिन के अंदर होने लगा। Waymo जैसे प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, जो इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, Zoox का पेट्रोल गाड़ियों पर निर्भर रहना इस सुरक्षा चूक का बड़ा कारण बना है।
Amazon के बिजनेस पर असर
Amazon ने 2020 में Zoox को भविष्य की तकनीक में पकड़ बनाने के लिए खरीदा था। हालांकि, यह घटना केवल अटलांटा तक सीमित है और Amazon के कुल फाइनेंशियल नतीजों पर इसका असर नगण्य है, लेकिन यह कंपनी के लिए एक बड़ी ऑपरेशनल चुनौती है। कंपनी ने अब कुछ सीमित गतिविधियों को फिर से शुरू किया है, लेकिन यह घटना स्वायत्त तकनीक को शहरी इलाकों में स्केल करने की कठिनाइयों को उजागर करती है।
रेगुलेटरी दबाव और निवेशकों के लिए संकेत
स्वायत्त वाहन उद्योग पर दुनिया भर में रेगुलेटरी दबाव बढ़ रहा है। Tesla और Waymo जैसी कंपनियां भी पहले ही जांच के दायरे में हैं। Zoox के मामले में यह चिंता सॉफ्टवेयर के बजाय औद्योगिक सुरक्षा (Industrial Safety) से जुड़ी है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या यह जांच अन्य शहरों में भी शुरू होगी और कंपनी अपनी टेस्टिंग टाइमलाइन को कैसे बरकरार रखती है। फिलहाल कंपनी ने गाड़ियों में गैस मॉनिटरिंग इक्विपमेंट लगाने का वादा किया है ताकि सुरक्षा के प्रति भरोसा बहाल हो सके।
