भारत में अल्टरनेटिव फ्यूल (जैसे CNG, इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड) वाली गाड़ियों ने जून में रिकॉर्ड **40.35%** मार्केट शेयर हासिल कर लिया है। पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों के चलते ग्राहक अब कम रनिंग कॉस्ट वाली गाड़ियों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं। कुल मिलाकर, गाड़ियों की रिटेल बिक्री पिछले साल के मुकाबले **21.8%** बढ़कर **26 लाख** यूनिट्स पर पहुंच गई, जिसमें CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड ज़बरदस्त रही।
ग्राहकों का बदला मिजाज, अल्टरनेटिव फ्यूल का दबदबा
जून के महीने में भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में ग्राहकों की पसंद का एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) जैसी अल्टरनेटिव फ्यूल वाली गाड़ियों ने पैसेंजर व्हीकल रिटेल सेल्स में रिकॉर्ड 40.35% का मार्केट शेयर अपने नाम कर लिया। मई में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद, खरीदार अब उन गाड़ियों को तरजीह दे रहे हैं, जिनकी रोज़ाना की रनिंग कॉस्ट कम हो।
बिक्री के आंकड़े और सेगमेंट की ग्रोथ
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, जून में कुल ऑटोमोटिव रिटेल मार्केट में पिछले साल की तुलना में 21.8% की ग्रोथ देखी गई, और यह 26 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया। पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 410,853 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल से 28.6% ज़्यादा है। इस सेगमेंट में CNG वाली गाड़ियां सबसे ज़्यादा लोकप्रिय रहीं, जिन्होंने कुल बिक्री का 24.3% हिस्सा कवर किया। इसके बाद हाइब्रिड गाड़ियों का नंबर आया, जिन्होंने 8.3% मार्केट शेयर लिया, और फिर इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने 7.8% का शेयर हासिल किया। Maruti Suzuki जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने CNG मॉडल्स की बुकिंग में 40% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, जो ग्राहकों के बदलते व्यवहार को साफ दर्शाता है।
टू-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक की बढ़ती पैठ
भारत में सबसे ज़्यादा बिकने वाले टू-व्हीलर सेगमेंट में भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) को अपनाने की रफ्तार तेज़ हो गई है। जून में, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का मार्केट में हिस्सा 10.6% तक पहुंच गया, जो पहली बार डबल डिजिट में आया है। यह दिखाता है कि बढ़ती फ्यूल कॉस्ट का असर न सिर्फ़ बजट पर ध्यान देने वाले पैसेंजर व्हीकल खरीदारों पर, बल्कि बड़े पैमाने पर टू-व्हीलर ग्राहकों पर भी पड़ रहा है।
इंडस्ट्री का भविष्य और चुनौतियाँ
हालांकि, मौजूदा बिक्री के आंकड़े ज़बरदस्त मांग का संकेत दे रहे हैं, लेकिन इंडस्ट्री के लीडर्स भविष्य को लेकर सतर्क बने हुए हैं। भू-राजनीतिक तनावों के चलते ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट में आई हालिया अस्थिरता का असर सप्लाई चेन और प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ा है। FADA के लीडरशिप का कहना है कि सप्लाई चेन की समस्याएँ अब धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं, लेकिन मार्केट के पूरी तरह सामान्य होने में कुछ और क्वार्टर लग सकते हैं। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या फ्यूल प्राइस की अस्थिरता थमने के बाद भी अल्टरनेटिव फ्यूल की ओर यह झुकाव बना रहेगा, या यह ग्राहकों की खरीददारी की आदतों में एक स्थायी बदलाव है। CNG और EV मैन्युफैक्चरिंग में ज़्यादा हिस्सेदारी रखने वाली कंपनियों की रफ्तार जारी रह सकती है, जबकि अगर ज़्यादा एफिशिएंट गाड़ियों का ट्रेंड बना रहा तो पारंपरिक इंटरनल कंबस्चन इंजन वाली गाड़ियों की बिक्री पर दबाव बढ़ सकता है।
