गाड़ियों के बाजार में बड़ा बदलाव: इन ईंधनों वाली गाड़ियों ने मारी 40% की बाजी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
गाड़ियों के बाजार में बड़ा बदलाव: इन ईंधनों वाली गाड़ियों ने मारी 40% की बाजी!

भारत में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में पेट्रोल-डीज़ल की गाड़ियों को बड़ा झटका लगा है। जून 2026 तक, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), हाइब्रिड और CNG जैसी वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों की बिक्री **40%** तक पहुंच गई है। बढ़ती फ्यूल कीमतों और कम रनिंग कॉस्ट की चाहत ने ग्राहकों का रुख इन गाड़ियों की ओर मोड़ दिया है। Tata Motors, Bajaj Auto और TVS Motor जैसी कंपनियां इस मांग को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं।

बाज़ार में आई नई लहर: अल्टरनेटिव फ्यूल व्हीकल्स का दबदबा

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर एक नए मुकाम पर पहुंच गया है, जहाँ जून 2026 में पैसेंजर व्हीकल की कुल रिटेल बिक्री में अल्टरनेटिव फ्यूल वाली गाड़ियों ने 40% से ज़्यादा की हिस्सेदारी हासिल कर ली है। यह बदलाव साफ तौर पर ग्राहकों की बदलती पसंद को दर्शाता है, जो पेट्रोल और डीज़ल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच कम रनिंग कॉस्ट वाली गाड़ियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आपको बता दें कि फरवरी के बाद से बड़े शहरों में पेट्रोल-डीज़ल के दाम ₹7 से ₹11 तक बढ़ चुके हैं।

कौन आगे, कौन पीछे?

अल्टरनेटिव फ्यूल विकल्पों में, CNG गाड़ियां 24.3% के साथ बाज़ार में सबसे आगे हैं। वहीं, हाइब्रिड गाड़ियों ने 8.3% और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ने 7.8% बाज़ार पर कब्ज़ा किया है। हालांकि, इलेक्ट्रिक व्हीकल की शुरुआती कीमत ज़्यादा होती है, लेकिन लंबे समय में फ्यूल और मेंटेनेंस पर होने वाली बचत ग्राहकों के फैसले को प्रभावित कर रही है। इस समय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है, जो कुल EV बिक्री का लगभग 63% है। जून में इस सेगमेंट में एंट्री लेवल 10.6% तक पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण शहरी इलाकों के हिसाब से बैटरी रेंज और राज्य सरकारों से मिलने वाले टैक्स में छूट है।

ऑटो कंपनियों की बड़ी तैयारी

बदलती मांग को पूरा करने के लिए ऑटो कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी में तेज़ी से बदलाव कर रही हैं। Tata Motors ने जून में अपनी मंथली EV बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 183% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, और यह इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 40% मार्केट शेयर के साथ लीड कर रही है। टू-व्हीलर मार्केट में Bajaj Auto और TVS Motor मांग को पूरा करने के लिए प्रोडक्शन बढ़ा रहे हैं। Bajaj Auto अपने Chetak मॉडल का प्रोडक्शन 50,000 यूनिट से बढ़ाकर 60,000 यूनिट प्रति माह करने पर काम कर रही है, जबकि TVS Motor अपनी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कैपेसिटी को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 यूनिट प्रति माह करने जा रही है।

सरकारी नीतियां और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती

FAME और PM-E-Drive जैसी सरकारी योजनाएं पारंपरिक और अल्टरनेटिव फ्यूल व्हीकल्स के बीच की कीमत खाई को पाटने के लिए ज़रूरी इंसेटिव देकर इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही हैं। हालांकि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास अभी भी एक बड़ा क्षेत्र है जिस पर निवेशकों को नज़र रखनी होगी। फिलहाल, देश में हर पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर लगभग 235 इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं। चार्जिंग नेटवर्क की डेंसिटी जिस तेज़ी से बढ़ेगी, वह इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स की लॉन्ग-टर्म एडॉप्शन रेट के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। निवेशकों को इन ऑटो कंपनियों की कैपिटल स्पेंडिंग प्लान्स और लो-एमिशन टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ते हुए अपने मार्जिन को बनाए रखने की उनकी क्षमता पर लगातार नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.