Automotive Research Association of India (ARAI) ने पुणे और कर्नाटक में नई EV टेस्टिंग फैसिलिटीज शुरू की हैं। भारी उद्योग मंत्रालय से मिली **₹76 करोड़** की ग्रांट के जरिए अब ऑटो कंपनियों को बैटरी और पावरट्रेन टेस्टिंग के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
अपनी 60वीं सालगिरह मना रही ARAI ने इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री को एक बड़ा बूस्ट दिया है। भारी उद्योग मंत्रालय से मिली ₹76 करोड़ की कैपिटल ग्रांट का इस्तेमाल करके पुणे और कर्नाटक में अत्याधुनिक लैब तैयार की गई हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारतीय कंपनियों को अपनी गाड़ियों की सेफ्टी और परफॉर्मेंस सर्टिफिकेशन के लिए दूसरे देशों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
क्या खास है नई सुविधाओं में?
पुणे और कर्नाटक में शुरू की गई इन लैब्स का मुख्य फोकस EV की सबसे जरूरी कड़ी यानी बैटरी पर है। यहाँ थर्मल प्रोपेगेशन, फायर एक्सपोजर और वाइब्रेशन जैसे कड़े टेस्ट किए जा सकेंगे, जो भारत के नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिए अनिवार्य हैं। इसके अलावा, 440 kW की क्षमता वाली नई ई-एक्सल फैसिलिटी भी शुरू की गई है, जिससे पैसेंजर और कमर्शियल दोनों तरह के वाहनों के प्रोपल्शन सिस्टम की जांच सटीक तरीके से हो पाएगी।
कंपनियों के लिए क्यों है यह गेम-चेंजर?
EV बनाने वाली छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए यह एक बड़ी सुविधा है। अब उन्हें टेस्टिंग के लिए महंगे और लंबे समय लेने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रोसेस से नहीं गुजरना होगा। ARAI द्वारा कॉमन इंजीनियरिंग प्लेटफॉर्म देने से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम होगी और नए मॉडल्स के बाजार में आने का इंतजार भी घटेगा।
भविष्य की तैयारी
ARAI अब अपनी पहुंच को और बढ़ा रहा है। कर्नाटक के मांड्या में कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट टेस्टिंग साइट की योजना फाइनल हो चुकी है। आने वाले समय में संस्था का ध्यान वायरलेस चार्जिंग, नई बैटरी केमिस्ट्री और AI आधारित व्हीकल सिस्टम पर होगा। इन नई टेक्नोलॉजीज की झलक अपकमिंग 'भारत मोबिलिटी 2027' इवेंट में देखने को मिल सकती है, जो भारत को एक ग्लोबल ऑटो हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
