भारत में अब एडवांस्ड ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक आम कारों के लिए सुलभ हो गई है। पिछले एक साल में इसकी हार्डवेयर कॉस्ट **40%** तक कम हुई है, जिससे अब किफायती गाड़ियों में भी ऑटोमैटिक ब्रेकिंग जैसे फीचर्स मिल सकेंगे। हालांकि, भारतीय सड़कों की जटिल परिस्थितियों के कारण ग्राहकों का भरोसा जीतना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। एक साल पहले तक जिस ADAS तकनीक के लिए $380-$450 की हार्डवेयर लागत आती थी, वह अब घटकर $220-$280 के बीच रह गई है। इस भारी गिरावट का सीधा मतलब है कि अब यह सुरक्षा तकनीक सिर्फ लग्जरी गाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मास-मार्केट सेगमेंट (बजट वाली SUV और कॉम्पैक्ट कारों) में भी आसानी से उपलब्ध होगी।
Bharat NCAP का असर
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर 'भारत NCAP' (Bharat NCAP) प्रोग्राम है। सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता और 4-स्टार या 5-स्टार रेटिंग की होड़ ने कार निर्माताओं को मजबूर किया है कि वे सक्रिय सुरक्षा फीचर्स जैसे ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन-कीपिंग असिस्ट को अपनी बजट कारों के मिड-लेवल ट्रिम्स में भी दें। Mobileye और Valeo जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस मांग को पूरा करने के लिए अपनी तकनीक को सस्ते और कस्टमाइज्ड तरीके से पेश कर रही हैं।
भारतीय सड़कों और ग्राहकों की चुनौती
तकनीक सस्ती तो हो गई, लेकिन भारतीय सड़कों का मिजाज इसे कड़ी चुनौती दे रहा है। अनिश्चित लेन मार्किंग, भारी मॉनसून और सड़कों पर दोपहिया वाहनों की भारी भीड़ के बीच ADAS सिस्टम का सटीक काम करना एक बड़ी परीक्षा है। मार्केट सर्वे के मुताबिक, लगभग 70% खरीदार अभी भी इन सिस्टम्स की विश्वसनीयता को लेकर संशय में हैं।
अब ऑटो कंपनियों के सामने एक दुविधा है—या तो वे सस्ती 'विजन-ओनली' (सिर्फ कैमरा आधारित) सिस्टम दें, जो खराब मौसम में संघर्ष कर सकते हैं, या फिर महंगे रडार और LiDAR आधारित सिस्टम लगाएं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को यह देखना होगा कि कौन से OEMs अपनी सेल्स वॉल्यूम बढ़ाने के लिए बिना कीमतें बढ़ाए इन फीचर्स को जोड़ पाते हैं। साथ ही, भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) द्वारा सुरक्षा प्रोटोकॉल में किए जाने वाले बदलावों पर नजर रखें, क्योंकि ये छोटे निर्माताओं के लिए R&D खर्च बढ़ा सकते हैं और सेक्टर में कंसोलिडेशन ला सकते हैं।
