Auto Component Sector: रिकॉर्ड टर्नओवर के बाद ACMA का बड़ा बदलाव, अब 'Innovate in India' पर फोकस

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AuthorAditya Rao|Published at:
Auto Component Sector: रिकॉर्ड टर्नओवर के बाद ACMA का बड़ा बदलाव, अब 'Innovate in India' पर फोकस

ACMA के प्रेसिडेंट विक्रमपति सिंघानिया ने ऑटो कंपोनेंट सेक्टर को अब केवल लो-कॉस्ट मैन्युफैक्चरिंग से निकलकर हाई-वैल्यू डिजाइन और इनोवेशन पर ध्यान देने की सलाह दी है। वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री ने **₹7.6 लाख करोड़** का रिकॉर्ड टर्नओवर दर्ज किया है, लेकिन टेक्नोलॉजी के लिए आयात पर निर्भरता चिंता का विषय बनी हुई है।

भारतीय ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। 2 सितंबर 2026 को आयोजित ACMA के एनुअल सेशन में प्रेसिडेंट विक्रमपति सिंघानिया ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि इंडस्ट्री 'मेक इन इंडिया' की पारंपरिक लो-कॉस्ट मैन्युफैक्चरिंग के दायरे से बाहर निकले। अब फोकस 'क्रिएट, इंजीनियर और इनोवेट इन इंडिया' पर है, ताकि घरेलू कंपनियां अपना खुद का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी बना सकें और ग्लोबल मार्केट में मुकाबला कर सकें।

FY26 के आंकड़े और ग्रोथ

इंडस्ट्री के लिए यह साल शानदार रहा है। वित्त वर्ष 2026 में टर्नओवर ₹7.6 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 12.7% की बढ़ोतरी है। इसमें OEM सप्लाई का बड़ा योगदान रहा, जो 16.3% बढ़कर ₹6.63 लाख करोड़ तक पहुंच गई। हालांकि टॉप-लाइन ग्रोथ दमदार है, लेकिन इंडस्ट्री को अब बेसिक असेंबली से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू सिस्टम डिजाइन करने की चुनौती लेनी होगी।

चुनौतियां और ट्रेड डेफिसिट

निवेशकों को सिर्फ ग्रोथ नंबर्स पर ही नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल रिस्क पर भी नजर रखनी चाहिए। वित्त वर्ष 2026 में एक्सपोर्ट $24 बिलियन रहा, जबकि इसी दौरान ऑटो कंपोनेंट का इंपोर्ट $25.4 बिलियन का रहा। यह ट्रेड डेफिसिट साफ दिखाता है कि हम मॉडर्न गाड़ियों, इलेक्ट्रिक सेंसर और एडवांस सॉफ्टवेयर के लिए अभी भी विदेशी टेक्नोलॉजी पर कितना ज्यादा निर्भर हैं।

MSMEs और भविष्य की राह

इंडस्ट्री के सामने एक बड़ी चुनौती MSMEs के आधुनिकीकरण की है। जैसे-जैसे गाड़ियां इलेक्ट्रिक और सॉफ्टवेयर-आधारित हो रही हैं, छोटी कंपनियों के लिए वजूद बचाए रखने के लिए टेक्नोलॉजी और कैपिटल की जरूरत बढ़ गई है। आगे चलकर कंपनियों का R&D पर खर्च और 'इंपोर्ट सब्स्टिट्यूशन' के संकेत ही तय करेंगे कि वे अपने मार्जिन को कैसे मेंटेन रखती हैं और ग्लोबल प्लेयर्स के सामने कितनी मजबूती से खड़ी रहती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.