2-Wheeler Sales: फेस्टिव सीजन से पहले टेंशन! मॉनसून की कमी से रफ्तार होगी धीमी

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AuthorAditya Rao|Published at:
2-Wheeler Sales: फेस्टिव सीजन से पहले टेंशन! मॉनसून की कमी से रफ्तार होगी धीमी

भारतीय टू-व्हीलर सेक्टर ने चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (H1 FY27) में **21%** की शानदार ग्रोथ दिखाई है। लेकिन, **13%** मॉनसून की कमी ने अब रूरल डिमांड को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे साल के बाकी हिस्से के लिए मार्केट एक्सपर्ट्स सतर्क हो गए हैं।

भारत के टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही काफी दमदार रही है, जिसमें रिटेल सेल्स पिछले साल के मुकाबले 21% बढ़ी है। हालांकि, जैसे-जैसे फेस्टिव सीजन करीब आ रहा है, बाजार अब एक संभावित सुस्ती के लिए खुद को तैयार कर रहा है। रूरल (ग्रामीण) इनकम पर मॉनसून की मार का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।\n\n### मॉनसून का सीधा असर\n\nइंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती देशभर में हुई 13% मॉनसून की कमी है। कर्नाटक और नॉर्थ-ईस्ट जैसे राज्यों में बारिश की कमी 25% से भी ज्यादा रही है। चूंकि रूरल मार्केट एंट्री-लेवल मोटरसाइकिल की बिक्री का बड़ा हिस्सा है, इसलिए खेती में कमी सीधे किसानों की खर्च करने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। फिलहाल जलाशय (Reservoirs) अपनी क्षमता के लगभग 70% पर हैं, और यदि सूखे के हालात बने रहते हैं, तो आने वाली रबी फसल पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।\n\n### कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन\n\nकंपनियों का परफॉर्मेंस उनके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के हिसाब से अलग-अलग रहा है:\n\n* TVS Motor: कंपनी की रिटेल सेल्स सितंबर में 42.4% बढ़ी और इसने 20.37% मार्केट शेयर हासिल किया। इसका श्रेय उनके इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों सेगमेंट को जाता है।\n* Hero MotoCorp: रूरल डिमांड पर निर्भर रहने के बावजूद, कंपनी ने 31.4% की ग्रोथ दिखाई है।\n* Bajaj Auto: घरेलू बाजार में कंपनी की सेल्स में 12% की गिरावट दिखी, लेकिन इन्होंने एक्सपोर्ट्स में 34% की उछाल के साथ इसे बैलेंस कर लिया।\n* Eicher Motors: प्रीमियम सेगमेंट में डिमांड स्थिर है, हालांकि ऊंचे सीसी वाले मॉडल्स में ग्राहकों की सतर्कता देखी जा रही है।\n\n### भविष्य के अनुमान\n\nइस साल के बाकी हिस्से के लिए जानकारों की राय बंटी हुई है। CRISIL को उम्मीद है कि कुल वॉल्यूम ग्रोथ 7% से 9% के बीच रह सकती है और सेल्स 29 मिलियन यूनिट्स को पार कर सकती है। वहीं, ICRA का अनुमान 3% से 5% के बीच ही है। इसका मुख्य कारण 'हाई बेस इफेक्ट' (High Base Effect) है, जिसका मतलब है कि पिछले साल की भारी बिक्री के कारण इस बार बड़ी ग्रोथ दिखाना गणितीय रूप से कठिन हो गया है। साथ ही, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण पिछले 6 महीनों में वाहनों की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.