कंपनी का नया दांव: टैक्स नहीं, कीमत पर फोकस
Tata Motors पैसेंजर व्हीकल्स इंडस्ट्री की इस बात से अलग राय रख रहा है कि सरकार को फ्लेक्स-फ्यूल वाली गाड़ियों (FFVs) को बढ़ावा देने के लिए GST में कटौती करनी चाहिए। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्रा का कहना है कि टैक्स में भारी कटौती करने के बजाय, अगर एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल की रिटेल कीमत कम रखी जाए तो ग्राहक ज़्यादा आकर्षित होंगे। उनका तर्क है कि ज़्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल से गाड़ी की माइलेज थोड़ी कम हो जाती है, इसलिए सीधे फ्यूल सस्ता होने से ग्राहकों को ज़्यादा फायदा होगा।
मार्केट में कड़ी टक्कर और EV की बढ़ती डिमांड
यह बयान ऐसे समय आया है जब ऑटो सेक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई से जूझ रहा है। हाल ही में वेस्ट एशिया में बढ़े तनाव के बाद, Tata Motors की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बुकिंग्स में 2 से 2.5 गुना तक की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। कंपनी अपनी EV प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाकर 15,000 यूनिट्स प्रति महीना करने की तैयारी में है। हालांकि, भारतीय EV मार्केट में Tata Motors भले ही आगे हो, लेकिन Mahindra & Mahindra जैसी कंपनियां कड़ी टक्कर दे रही हैं। हाल ही में Mahindra ने FY26 के लिए EV रेवेन्यू में Tata Motors को पीछे छोड़ दिया था। इसके अलावा, स्टील और कॉपर जैसे रॉ मटेरियल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में 5% का उछाल आया है, जिससे कंपनी पर मार्जिन बचाने का दबाव बढ़ गया है।
फ्लेक्स-फ्यूल पर खतरा
EV और एथेनॉल की ओर बढ़ते कदम के बावजूद, कंपनी के सामने कुछ बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। रॉ मटेरियल की महंगाई के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव बन सकता है। साथ ही, EV मार्केट में एंट्री लेवल पर ग्रोथ धीमी पड़ने लगी है। फ्लेक्स-फ्यूल स्ट्रैटेजी पर भी तकनीकी सवाल उठ रहे हैं। ज़्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल से इंजन के पुर्जों पर घिसावट बढ़ सकती है और माइलेज कम हो सकती है, खासकर अगर इंजन को ठीक से कैलिब्रेट न किया जाए। अगर सरकार E25 या E30 जैसे एथेनॉल ब्लेंड्स को बिना ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और कंपोनेंट सपोर्ट के लागू करती है, तो कंपनी की ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहकों के बीच। कंपनी का P/E रेश्यो फिलहाल 42x के आसपास चल रहा है, जो भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। अगर कंपनी अपनी ICE, EV और फ्लेक्स-फ्यूल पोर्टफोलियो के ट्रांजीशन को ठीक से मैनेज नहीं कर पाई, तो बड़े इन्वेस्टर्स शेयर की कीमत में कटौती कर सकते हैं।
आगे का रास्ता
FY27 के लिए कंपनी इंडस्ट्री में 10% ग्रोथ का अनुमान लगा रही है, लेकिन एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर फ्यूल की कीमतें बढ़ती रहीं तो पैसेंजर व्हीकल्स की डिमांड पर असर पड़ सकता है। Tata Motors 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार लॉन्च करने की योजना बना रही है। लेकिन असली मुकाबला EV सेगमेंट में ही रहेगा, जहां कंपनी को JSW MG Motor और Mahindra जैसी कंपनियों से अपनी मार्केट हिस्सेदारी बचानी होगी। साथ ही, EV मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के भारी-भरकम खर्च और अपने पुराने कम्बशन इंजन बिजनेस से मुनाफा बनाए रखने के बीच संतुलन साधना होगा।
