पेट्रोल के दाम बढ़े, ईवी की मांग में तेज़ी
पिछले कुछ समय से अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में चल रहे भू-राजनैतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और सीएनजी (CNG) के दामों पर देखा जा रहा है, जो मई के मध्य में 3 रुपये प्रति लीटर (पेट्रोल) और 2 रुपये प्रति किलो (सीएनजी) तक बढ़ गए। इस बढ़ोतरी ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-2W) को अपनाने की ओर ग्राहकों को तेज़ी से मोड़ दिया है। नतीजतन, मई 2026 में ई-2W का रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 41.6% बढ़कर 1,49,509 यूनिट तक पहुँच गया। खासकर गिग इकोनॉमी (Gig Economy) के लिए, जहाँ रोज़मर्रा की भाग-दौड़ के लिए वाहन ज़रूरी है, अब इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ ज़्यादा किफ़ायती साबित हो रही हैं।
बड़ी कंपनियों कीThe Competition
इस बढ़ती मांग का फायदा उठाने में टीवीएस मोटर (TVS Motor) और बजाज ऑटो (Bajaj Auto) जैसी बड़ी कंपनियां सबसे आगे हैं। टीवीएस, जिसका P/E रेश्यो करीब 58.6 है, अपने मज़बूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की बदौलत बाज़ार में अपनी पकड़ बनाए हुए है। वहीं, बजाज ऑटो, जिसका P/E रेश्यो लगभग 28.5 है, अपने चेतक (Chetak) प्लेटफॉर्म के ज़रिए बाज़ार में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर, ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) जैसी विशुद्ध ईवी कंपनियां, जो भारी नेट लॉस (Net Loss) के चलते नेगेटिव P/E रेश्यो दिखा रही हैं, उन्हें बड़ी कंपनियों से मुकाबला करने में ज़्यादाThe scrutiny का सामना करना पड़ रहा है। जहाँ पारंपरिक कंपनियां कई स्रोतों से कमाई करती हैं, वहीं ये ईवी-केंद्रित कंपनियां सिर्फ़ सरकारी नीतियों पर निर्भर हैं।
सब्सिडी का ख़तरा और भविष्य की राह
ईवी बाज़ार फिलहाल 'पीएम ई-ड्राइव' (PM E-Drive) स्कीम के सहारे चल रहा है। मई 2026 के अंत तक, इस स्कीम के तहत 23.5 लाख से ज़्यादा वाहन सब्सक्राइब हो चुके थे, जो स्कीम के कुल लक्ष्य 24.7 लाख के काफ़ी करीब है। हालांकि इंडस्ट्री की मांग पर स्कीम को जुलाई तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन इसके बाद सब्सिडी का खत्म होना इंडस्ट्री के लिए एक बड़ाThe risk है। 2025 के आंकड़े बताते हैं कि सरकारीThe support में कमी आने पर बाज़ार तुरंतThe stagnation का शिकार हो सकता है, क्योंकि इलेक्ट्रिक और पेट्रोल वाहनों के बीचThe price का अंतरThe intervention के बिना बढ़ जाता है। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय का FY27 के लिए अतिरिक्तThe budget की मांग करना, मौजूदाThe growth model मेंThe fiscal instability को दर्शाता है।
आगे क्या?
बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि भले हीThe current momentumThe healthy है, परThe long-termThe successThe subsidy-ledThe adoption से हटकरThe self-sustainingThe market viability की ओर जाने पर निर्भर करेगा। ईवी काThe penetrationThe currentThe approx 6.5% है,The growth कीThe scopeThe काफीThe substantial है, बशर्ते कंपनियां The battery efficiencyThe सुधारें औरThe manufacturing costsThe कम कर सकें। हालांकि,The investors को आने वालेThe months मेंThe volatilityThe उम्मीदThe करनी चाहिए, खासकरThe अगरThe पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहतThe budgetThe इंडस्ट्रीThe उम्मीदोंThe परThe खराThe न उतरे। ऐसाThe होने परThe 2025 मेंThe देखीThe गईThe market decelerationThe जैसीThe consolidation phaseThe देखनेThe मिलThe सकतीThe है।
