पश्चिम बंगाल सरकार ने आलू की अंतर-राज्यीय (interstate) आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटा दी हैं। किसानों की मदद के लिए अब **₹1,120 प्रति क्विंटल** का फ्लोर प्राइस और **₹50 प्रति क्विंटल** की ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही, **₹150 करोड़** के निवेश से सोलर कोल्ड स्टोरेज भी बनाए जाएंगे।
मार्केट में बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल सरकार ने आलू मार्केट को स्थिरता देने के लिए नीतिगत बदलावों का ऐलान किया है। अब राज्य से बाहर आलू भेजने पर कोई रोक नहीं होगी, जिससे सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें दूर होंगी। नेशनल मार्केट में राज्य के आलू को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ₹50 प्रति क्विंटल की ट्रांसपोर्ट सब्सिडी भी देगी, जो रेल और सड़क दोनों मार्गों पर लागू होगी।
किसानों के लिए सुरक्षा कवच
कीमतों में भारी गिरावट से बचाने के लिए सरकार ने एक फ्लोर प्राइस मैकेनिज्म शुरू किया है। यदि मार्केट रेट ₹1,120 प्रति क्विंटल से नीचे गिरता है, तो सरकार अंतर की राशि किसानों को देगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पूरा प्रीमियम राज्य सरकार वहन करेगी। वहीं, PM-किसान सम्मान निधि के तहत पात्र परिवारों को सालाना लाभ बढ़ाकर ₹9,000 कर दिया गया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर
लंबे समय के समाधान के लिए सरकार ₹150 करोड़ के निवेश से 50 मंडियों में सोलर-पावर्ड कोल्ड स्टोरेज बनाएगी। 'स्मार्ट मंडी' और 'सुफल बांग्ला' (Sufal Bangla) प्रोग्राम के विस्तार से सीधे किसानों से खरीद को बढ़ावा मिलेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए राय
हालांकि ये कदम राहत देने वाले हैं, लेकिन सरकारी खजाने पर सब्सिडी और मुआवजा देने का वित्तीय दबाव बढ़ेगा। फिलहाल सरकार के सामने कोल्ड स्टोरेज में रखे 27 लाख क्विंटल आलू के सरप्लस को साल के अंत तक क्लियर करने की बड़ी चुनौती है। निवेशकों के लिए, बेहतर कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नए अवसर पैदा हो सकते हैं, लेकिन सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता और फसल की अनिश्चितता जैसे जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है।
