Wayanad भीषण जलवायु संकट की चपेट में है। साल 2026 में औसत तापमान बढ़कर **29.2°C** पहुंच गया है और मानसून में **37%** की भारी कमी देखी गई है। यह पर्यावरण असंतुलन इलाके की प्रमुख नकदी फसलों जैसे Coffee और Pepper के लिए गंभीर खतरा बन गया है, जिससे सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ रहा है।
केरल का प्रमुख कृषि हब, वायनाड, इस समय एक गंभीर जलवायु परिवर्तन (Climate Crisis) से जूझ रहा है। सितंबर 2026 के पहले पखवाड़े में औसत तापमान 29.2°C दर्ज किया गया, जबकि 2025 की समान अवधि में यह 27.3°C था। तापमान में इस उछाल के साथ 37% मानसून घाटा जिले की कृषि स्थिरता को हिला कर रख देने के लिए काफी है।
फसलों पर असर
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से Robusta कॉफी, काली मिर्च और धान पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि कॉफी के पौधों में समय से पहले फूल आने लगे हैं, जो इस बात का संकेत है कि फसलें खराब मौसम के दबाव में हैं। पैदावार में कमी आने से स्थानीय किसानों की आय पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही इन कमोडिटीज पर निर्भर कंपनियों की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है।
सरकार का बचाव प्लान (KERA Project)
इस जोखिम से निपटने के लिए केरल सरकार ने World Bank के साथ मिलकर 'KERA' (Kerala Climate Resilient Agri-Value Chain Modernisation) प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोग्राम के लिए लगभग ₹2,365 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। इसका लक्ष्य कृषि को मौसम के अनुकूल बनाना, वैल्यू चेन को बेहतर करना और स्थानीय किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट स्कीम लागू करना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और चुनौतियां
कृषि के अलावा, जिले में जलस्तर लगातार नीचे गिर रहा है। प्राकृतिक वनों के कटान और बढ़ते कंक्रीट के ढांचे के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है। इसके अलावा, अनिश्चित बारिश के कारण भूस्खलन (Landslides) का खतरा भी बढ़ गया है। सितंबर की शुरुआत में मिट्टी का तापमान 39°C तक पहुंच गया था, जो वहां के श्रमिकों और पर्यावरण के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अब निवेशकों और स्थानीय व्यापार के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि KERA प्रोजेक्ट इन चुनौतियों से निपटने में कितना सफल रहता है।
