Kalanamak Rice: यूपी के 'काला नमक' चावल की चमक बढ़ी, कीमत पहुंची **₹200** के पार

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AuthorAditya Rao|Published at:
Kalanamak Rice: यूपी के 'काला नमक' चावल की चमक बढ़ी, कीमत पहुंची **₹200** के पार

सिद्धार्थनगर का पारंपरिक 'काला नमक' चावल अब ब्रांडेड कमोडिटी बन चुका है। ODOP स्कीम के तहत इसकी प्रोसेसिंग और पहुंच बढ़ने से दाम **₹200** प्रति किलो तक पहुंच गए हैं और खेती का दायरा बढ़कर **20,000 हेक्टेयर** हो गया है।

बाजार में आई शानदार तेजी

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) पहल के तहत, जो चावल कभी ₹40-50 प्रति किलो (2018 में) बिकता था, वह अब ₹150-200 प्रति किलो के भाव तक पहुंच गया है। अपनी खुशबू और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण यह चावल अब एक प्रीमियम कमोडिटी बन चुका है।

वैल्यू एडिशन से बढ़ी कमाई

किसान अब केवल कच्चा धान नहीं बेच रहे, बल्कि सरकारी 'कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स' का उपयोग करके चावल की पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इससे बने न्यूट्रिशनल कुकीज जैसे प्रोडक्ट्स दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में अच्छी मार्जिन दिला रहे हैं। पीएमएफएमई (PMFME) स्कीम की मदद से आधुनिक उपकरण लगाकर किसान पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को भी कम कर रहे हैं।

खेती का विस्तार और चुनौतियां

2018 में जहां इसकी खेती केवल 2,000 हेक्टेयर में होती थी, वहीं अब यह 20,000 हेक्टेयर तक फैल चुकी है। हालांकि, चुनौतियां अभी भी कायम हैं। 'नेक ब्लास्ट' जैसे कीट और फसलों के गिरने (Crop Lodging) का खतरा बना हुआ है, जिससे निपटने के लिए नई किस्में विकसित की जा रही हैं।

रिस्क फैक्टर: MSP की कमी

सबसे बड़ा आर्थिक जोखिम यह है कि इस GI-टैग्ड उत्पाद के लिए कोई निश्चित 'मिनिमम सपोर्ट प्राइस' (MSP) नहीं है। किसानों की आय पूरी तरह से रिटेल डिमांड और डिजिटल मार्केटिंग पर टिकी है। अगर भविष्य में संगठित खुदरा मांग (Organized Retail Demand) कम होती है, तो किसानों को अनसोल्ड इन्वेंट्री के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.