UPL के शेयरों में आज ज़बरदस्त उछाल देखा गया। इसकी मुख्य वजह कंपनी की तरफ से दो अहम घोषणाएं रहीं: पहला, अपनी सब्सिडियरी Advanta की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) फाइलिंग, और दूसरा, भारत-अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट से जुड़ी उम्मीदें, जो कंपनी के North America में कारोबार के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।
कंपनी का सबसे बड़ा फ़ोकस अपने कर्ज को कम करने पर है। UPL का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक अपने नेट डेट टू EBITDA रेशियो को 1.6-1.8x तक लाना है। फिलहाल, यह रेशियो दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों के लिए 2.5x है। इस लक्ष्य को हासिल करने में Advanta के IPO से मिलने वाली पूंजी अहम भूमिका निभाएगी। आपको बता दें कि दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में UPL ने ऑपरेशनल कैश फ्लो से करीब $400 मिलियन का कर्ज चुकाया है, लेकिन Advanta IPO से मिलने वाली रकम इस प्रक्रिया को और तेज़ करेगी।
इस बीच, हाल ही में हुए भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट से UPL की North America में स्थिति और मज़बूत होने की उम्मीद है। यह क्षेत्र कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 11% (दिसंबर 2025 तक नौ महीने) और FY25 में 13% रहा है। तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में यहां 3% की मामूली ग्रोथ देखी गई थी, जो आंशिक रूप से $30 मिलियन की सेल्स पोस्टपोनमेंट के कारण थी, जो US टैरिफ चुनौतियों के चलते हुई थी। अब, नए ट्रेड पैक्ट के तहत भारतीय एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ में कमी आने की उम्मीद है, खासकर चीन की तुलना में, जो एग्रोकेमिकल मार्केट में एक बड़ा सप्लायर है। इससे UPL को बढ़त मिलेगी और वह चीनी सप्लाई के दबाव का सामना कर सकेगी। इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने पूरे साल के लिए अपने ऑपरेटिंग अर्निंग ग्रोथ के अनुमान को 12-16% पर बरकरार रखा है।
फिलहाल, UPL का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹45,000 करोड़ है और इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो करीब 25x पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन वैश्विक दिग्गजों जैसे Corteva Agriscience (जिसका P/E लगभग 22x है) के आसपास है। हालांकि, Bayer Crop Science जैसे बड़े प्लेयर्स, जिनका बिजनेस ज्यादा डायवर्सिफाइड है, 18x के P/E पर ट्रेड करते हैं। ग्लोबल एग्रोकेमिकल सेक्टर इस वक्त बढ़ती रॉ मटेरियल कॉस्ट और एशियन मैन्युफैक्चरर्स की तरफ से लगातार प्राइसिंग प्रेशर का सामना कर रहा है। UPL के चौथी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, लेकिन मार्जिन में निरंतर विस्तार के लिए कंपनी को लागत बढ़ाकर ग्राहकों पर डालने और ट्रेड संबंधों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने की ज़रूरत होगी। एनालिस्ट्स की राय फिलहाल सतर्कता के साथ पॉजिटिव बनी हुई है।
