UPL ने धान की खेती के लिए एक नई तकनीक 'Alternate Wetting and Drying' (AWD) को प्रमोट करना शुरू किया है। इस तकनीक से मीथेन उत्सर्जन में **23%** की कमी और पैदावार में **5%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
खेती में तकनीक का कमाल
पारंपरिक रूप से धान के खेतों में पानी भरा रहता है, लेकिन UPL अब 'Alternate Wetting and Drying' (AWD) तकनीक को बढ़ावा दे रही है। इसमें खेतों को बीच-बीच में सुखाया जाता है, जिससे मिट्टी के कीटाणुओं द्वारा पैदा होने वाली मीथेन गैस में 23% की कमी आती है। 6,000 किसानों के साथ हुए पायलट प्रोजेक्ट में न केवल पर्यावरण को लाभ मिला, बल्कि चावल की फसल में भी 5% की बढ़त देखी गई। इसके अलावा, 2022 के डेटा के अनुसार, इस तरीके से पानी की खपत में 40% की बचत हुई है।
कंपनी की नई स्ट्रेटेजी
UPL अब सिर्फ केमिकल इनपुट्स तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी का लक्ष्य अब टेक्नोलॉजी-बेस्ड फार्मिंग सॉल्यूशंस पर है, जिससे किसानों के साथ संबंध मजबूत हो सकें। भविष्य में कंपनी कार्बन क्रेडिट्स जैसे रेवेन्यू मॉडल्स के जरिए कमाई करने की भी योजना बना रही है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
ग्लोबल स्तर पर World Bank और IMF जैसे मंचों पर इन प्रयासों की चर्चा के बावजूद, निवेशकों को कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर नजर रखनी होगी। एग्रोकेमिकल सेक्टर में इस समय डिमांड में उतार-चढ़ाव है और कमोडिटी की कीमतों का दबाव भी बना हुआ है। कंपनी का मुख्य फोकस फिलहाल अपना कर्ज कम करने पर है। देखना यह होगा कि क्या ये नई सस्टेनेबल सर्विसेज कंपनी के मार्जिन और कैश फ्लो में सुधार ला पाती हैं या नहीं।
