उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने 2025-26 सीजन के लिए किसानों का **94%** बकाया चुका दिया है। हालांकि, रिकॉर्ड हाई चीनी कीमतों के बीच सरकारी सख्ती और स्टॉक लिमिट से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने 2025-26 क्रशिंग सीजन के लिए किसानों के बकाया भुगतान में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अगस्त 2026 के अंत तक, प्रदेश की 99 मिलों ने किसानों का पूरा पैसा चुका दिया है, जिससे सप्लाई चेन में स्थिरता आई है। यह कदम गन्ना किसानों के साथ मिलों के संबंधों को मजबूत करता है, जो आने वाले सीजन के लिए भी सकारात्मक है।
सरकार की सख्ती और स्टॉक लिमिट
एक तरफ जहां मिलों ने भुगतान में तेजी दिखाई है, वहीं दूसरी ओर रिकॉर्ड हाई चीनी कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई को काबू में रखने के लिए 1 सितंबर 2026 से बल्क कंज्यूमर्स पर कड़े इन्वेंट्री लिमिट्स लागू किए जा रहे हैं। Balrampur Chini, Shree Renuka Sugars और Bajaj Hindusthan जैसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर है। हालांकि चीनी की ऊंची कीमतें रेवेन्यू बढ़ाती हैं, लेकिन सरकारी स्टॉक लिमिट मुनाफे (Bottom line) पर ब्रेक लगा सकती है।
प्रोडक्शन का संकट
सप्लाई साइड पर दबाव साफ दिख रहा है। 2025-26 सीजन में उत्तर प्रदेश का शुगर प्रोडक्शन 8.97 मिलियन टन रहा, जिसमें गिरावट दर्ज की गई है। खराब मौसम और 'रेड रॉट' (Red rot) बीमारी के कारण पैदावार पर असर पड़ा है। इस कम प्रोडक्शन ने कीमतों में उछाल तो भरा है, लेकिन मिलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्रशिंग सीजन जल्दी शुरू करने का दबाव डाल सकती है, जिससे शुगर रिकवरी रेट कम हो सकता है और मिलों की ऑपरेशनल लागत बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां सरकारी नियमों और अपनी मार्जिन के बीच संतुलन कैसे बैठाती हैं। इसके अलावा, एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम और मौसम की स्थिति आने वाले समय में इन शेयरों की चाल तय करेंगे।
