उत्तर प्रदेश सरकार **1 नवंबर** से धान खरीद का नया सीजन शुरू करने जा रही है, जिसमें **6.5 मिलियन टन** धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान **फरवरी 2027** तक चलेगा और डिजिटल पोर्टल व Direct Benefit Transfer के जरिए भुगतान को आसान बनाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सीजन 2026-27 के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। पिछले साल के 6.2 मिलियन टन के मुकाबले इस बार 6.5 मिलियन टन का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए 8 सरकारी एजेंसियों को लगाया गया है और प्रदेश भर में 4,500 कलेक्शन सेंटर तैयार किए गए हैं।
डिजिटल तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था
खरीद की प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। सरकार ने बिचौलियों को खत्म करने के लिए पूरी व्यवस्था को डिजिटलाइज कर दिया है। अब तक 38,000 से ज्यादा किसान सेंट्रल पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इस डिजिटल बदलाव का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी वेरिफिकेशन और 48 घंटे के भीतर किसानों के खाते में पैसा पहुंचाना है।
MSP और आर्थिक प्रोत्साहन
केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए MSP के तहत कॉमन वैरायटी धान ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान ₹2,461 प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जाएगा। इसके अलावा, किसानों को सफाई, छनाई और लोडिंग जैसी पोस्ट-हार्वेस्ट गतिविधियों के लिए ₹20 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा। समय पर भुगतान होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे मांग में तेजी आने की उम्मीद है।
चुनौतियां और जोखिम
इतने बड़े स्तर पर खरीद के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। वेयरहाउस में जगह की कमी और अनाज को मिलों तक ले जाने में देरी जैसे लॉजिस्टिक जोखिम बने हुए हैं। इसके साथ ही, सरकारी मानकों (जैसे नमी का स्तर) को पूरा न कर पाने की स्थिति में किसानों को केंद्र पर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी तंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह 48 घंटे के भीतर भुगतान के वादे को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करता है।
