Uttar Pradesh सरकार अब किसानों को सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट से जोड़ रही है। Farmer Producer Organisations (FPO) को बढ़ावा देकर राज्य का लक्ष्य कच्चा माल बेचने के बजाय प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट पर जोर देना है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो सके।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के ग्रामीण किसानों को हाई-वैल्यू सप्लाई चेन से जोड़ने के लिए एक बड़ा बदलाव शुरू किया है। अब तक जो किसान केवल कच्चा माल (raw commodity) बेचने तक सीमित थे, उन्हें अब फूड प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के जरिए बड़े बाजारों में पैठ बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद किसानों को स्थानीय मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर जोर
इंडस्ट्रियल-ग्रेड ऑपरेशंस के लिए जरूरी है कि किसानों के पास स्टोरेज और पैकेजिंग की सुविधा हो। सरकार की Agriculture Export Policy और Food Processing Industry Policy के तहत इन संगठनों को कोल्ड स्टोरेज जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे छोटे किसान भी सामूहिक रूप से एक्सपोर्ट मार्केट में बेहतर सौदेबाजी कर सकेंगे।
कैसे काम करेगा नया मॉडल?
केंद्र सरकार के 10,000 नए FPO बनाने के लक्ष्य के अनुरूप, यूपी सरकार 'क्लस्टर-बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशंस' की मदद ले रही है। ये संस्थाएं कंसल्टेंट की तरह काम करेंगी, जो बिजनेस प्लानिंग और रेगुलेटरी कंप्लायंस में मदद करेंगी ताकि शुरुआत में ही विफलताओं को कम किया जा सके।
निवेशकों के लिए संकेत
एग्री-इकोनॉमी में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए यह सप्लाई चेन में सुधार का मौका है। प्रोक्योरमेंट के सेंट्रलाइज्ड होने से लागत घटेगी और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को कच्चे माल की सप्लाई में आने वाली अस्थिरता से राहत मिलेगी। हालांकि, इस मॉडल की असली सफलता इस पर निर्भर करेगी कि ये FPO बिना सरकारी सपोर्ट के व्यावसायिक रूप से कितने लंबे समय तक टिक पाते हैं और अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी मानकों पर कितने खरे उतरते हैं।
