उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने अनाज भंडार को बढ़ाने और किसानों की मुश्किलों को कम करने के लिए मोबाइल गेहूं खरीद केंद्रों का विस्तार करने का फैसला लिया है। रबी सीजन के लिए MSP को बढ़ाकर ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार अपनी गेहूं खरीद रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार अब सीधे खेतों के पास मोबाइल सेंटर तैनात करेगी, ताकि 2025-26 और 2026-27 के रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान गिरते हुए सरकारी भंडार को फिर से भरा जा सके। अब तक किसानों को अपने अनाज को दूर स्थित केंद्रों तक ले जाना पड़ता था, जिससे उनकी लागत बढ़ती थी। अब गांव-गांव पहुंच रहे इन केंद्रों से लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्टेशन की लागत में भारी कमी आने की उम्मीद है।
डिजिटल भुगतान और नई MSP
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सहारा लिया है। सरकारी लक्ष्य है कि किसान को अनाज बेचने के 48 घंटे के भीतर भुगतान कर दिया जाए। इसके अलावा, किसानों को आकर्षित करने के लिए 2026-27 सीजन के लिए MSP को बढ़ाकर ₹2,585 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पिछले साल यानी 2025-26 में ₹2,425 प्रति क्विंटल थी।
निजी बाजार और चुनौतियां
ऐतिहासिक रूप से, सरकार को तब मुश्किल होती है जब खुले बाजार (ओपन मार्केट) में कीमतें MSP से ऊपर चली जाती हैं। ऐसे में किसान अपना अनाज निजी व्यापारियों को बेचना पसंद करते हैं, जिससे सरकार को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के लिए दूसरे राज्यों से गेहूं खरीदना पड़ता है। यह मोबाइल पहल इसी खाई को पाटने के लिए है, लेकिन इसके सामने कुछ जोखिम भी हैं।
अगर खुले बाजार में कीमतें सरकारी MSP से काफी ज्यादा बनी रहीं, तो मोबाइल केंद्रों की सुविधा होने के बावजूद किसान सरकारी सिस्टम से दूर रह सकते हैं। साथ ही, इतने बड़े स्तर पर विकेंद्रीकृत (decentralized) नेटवर्क चलाने का वित्तीय बोझ भी राज्य सरकार के खजाने पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इन परिचालन चुनौतियों और बढ़ती लागत को मैनेज करते हुए अपने खरीद लक्ष्यों को पूरा कर पाती है या नहीं।
