UN Food and Agriculture Organization (FAO) की 2026 की रिपोर्ट ने ग्लोबल फूड सिक्योरिटी को लेकर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से दुनिया के **58%** इलाकों में मिट्टी की गुणवत्ता खराब हुई है, जो भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने अपनी नई 'Status of the World's Soil Resources 2026' रिपोर्ट जारी की है, जो दुनिया के खाद्य उत्पादन के आधार यानी मिट्टी पर एक बड़ा संकट दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 95% वैश्विक खाद्य उत्पादन मिट्टी से जुड़ा है, लेकिन तेजी से घटती बायोडायवर्सिटी अब इसे खतरे में डाल रही है। चिंता की बात यह है कि दुनिया भर में 58% क्षेत्रों में मिट्टी के प्रबंधन में गिरावट देखी गई है, जबकि सुधार केवल 10% इलाकों में हुआ है।
कृषि क्षेत्र और नीतिगत बदलाव (Agricultural Policy Shift)
निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है क्योंकि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल मिट्टी की सेहत बिगाड़ रहा है। भारत में भी स्थिति गंभीर है, जहां अनुमानतः 30% से 37% भूमि डिग्रेडेशन (Degradation) का सामना कर रही है। रिपोर्ट में खास तौर पर नाइट्रोजन फर्टिलाइजर्स के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताई गई है।
आने वाले समय में, सरकारों की कृषि नीतियां 'रीजेनरेटिव फार्मिंग' (Regenerative Farming) की ओर झुक सकती हैं। अगर 2050 तक 25% उत्पादन की कमी से बचना है, तो कंपनियों को अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ सकता है, वरना सख्त पर्यावरण नियमों की मार झेलनी पड़ सकती है।
एग्री-बिजनेस के लिए लंबी अवधि के रिस्क
वैश्विक अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक हिस्सा सीधे प्रकृति पर निर्भर है। मिट्टी की उत्पादकता घटने से खेती की लागत बढ़ रही है और फसलों की गुणवत्ता गिर रही है। यह स्टॉक मार्केट के लिए कोई अचानक आया झटका नहीं है, लेकिन फर्टिलाइजर कंपनियों, सीड कंपनियों और बड़े फूड प्रोसेसर्स के लिए यह एक स्ट्रक्चरल रिस्क है। अब निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो सस्टेनेबल फार्मिंग मॉडल और ऑर्गेनिक इनपुट की तरफ बढ़ रही हैं, क्योंकि भविष्य में सरकारी सपोर्ट इन्हीं क्षेत्रों को मिलेगा।
