Triveni Engineering Share Price: निवेशकों को बड़ी राहत! कंपनी ने दर्ज किया ₹4 करोड़ का मुनाफा, कर्ज़ में भारी कटौती

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Triveni Engineering Share Price: निवेशकों को बड़ी राहत! कंपनी ने दर्ज किया ₹4 करोड़ का मुनाफा, कर्ज़ में भारी कटौती

Triveni Engineering & Industries ने पहली तिमाही में ₹1,581 करोड़ का नेट टर्नओवर दर्ज किया है और ₹4 करोड़ का मुनाफा कमाया है। चीनी की बेहतर कीमतों और अल्कोहल बिजनेस में वापसी से कंपनी को यह कामयाबी मिली है, साथ ही उन्होंने अपने स्टैंडअलोन डेट को भी घटाया है। अब निवेशक मानसून की कमी और इथेनॉल की मांग पर नजर रखेंगे।

Triveni Engineering के तिमाही नतीजे

Triveni Engineering & Industries, जो शुगर और इथेनॉल सेक्टर में एक जाना-माना नाम है, ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने ₹1,581 करोड़ का नेट टर्नओवर दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2.1% ज्यादा है। शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि कंपनी मुनाफे में लौट आई है। पहली तिमाही में ₹4 करोड़ का नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल Q1 FY26 में ₹7 करोड़ का घाटा था।

चीनी का कारोबार चमका

तिमाही नतीजों में चीनी सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा। Triveni ने 2,77,403 टन चीनी की बिक्री की, जो पिछले साल से 7.4% अधिक है। वहीं, चीनी की औसत कीमत ₹41,525 प्रति टन तक पहुंच गई, जो बाजार में मजबूत कीमतों का संकेत है। 30 जून 2026 तक, कंपनी के पास 0.36 मिलियन टन चीनी का स्टॉक था, जो पिछले साल के 0.45 मिलियन टन से कम है।

अल्कोहल बिजनेस में शानदार वापसी और कर्ज़ में कमी

कंपनी के अल्कोहल बिजनेस ने भी इस तिमाही में जोरदार वापसी की और मुनाफे में अहम योगदान दिया। मक्के की कम खरीद लागत, फीडस्टॉक की बेहतर इकोनॉमी और बाय-प्रोडक्ट्स से बेहतर रियलाइजेशन इस सुधार के मुख्य कारण रहे। Triveni का मैनेजमेंट इथेनॉल की लंबी अवधि की मांग पर भी फोकस कर रहा है, खासकर 'Beyond E-20' फ्रेमवर्क और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के बढ़ते चलन को देखते हुए।

वित्तीय अनुशासन भी कंपनी की प्राथमिकता रही। पहली तिमाही के अंत तक, कंपनी का स्टैंडअलोन ग्रॉस डेट घटकर ₹1,238 करोड़ रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1,603 करोड़ था। डेट में यह कमी कंपनी की बैलेंस शीट के लिए एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे ब्याज का बोझ कम होगा।

सेक्टर का हाल और आगे क्या देखें?

फिलहाल, भारतीय चीनी सेक्टर टाइट सप्लाई की स्थिति का सामना कर रहा है। अनुमान है कि 30 सितंबर 2026 तक देश में चीनी का स्टॉक 10 साल के निचले स्तर 4.1 मिलियन टन पर आ सकता है। यह एक्सपोर्ट और इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन का नतीजा है। इसके अलावा, मानसून में संभावित कमी से गन्ने की पैदावार पर असर पड़ने की चिंताएं हैं, जिससे उम्मीद है कि चीनी की कीमतें निकट भविष्य में मजबूत बनी रहेंगी।

हालांकि कंपनी ने परिचालन दक्षता दिखाई है, निवेशकों को कुछ बातों पर नजर रखनी चाहिए। इनमें मानसून की परिवर्तनशीलता का गन्ने की उपलब्धता पर असर, इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकारी नीतियों का विकास और फीडस्टॉक की बदलती लागतों के बीच कंपनी की मार्जिन सुधार बनाए रखने की क्षमता शामिल है। बाजार सहभागियों के लिए अगली महत्वपूर्ण अपडेट चीनी रियलाइजेशन के रुझान और आगामी सीजन के उत्पादन अनुमानों पर होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.