Tobacco Board का बड़ा फैसला: 2026-27 में FCV फसल का साइज़ 43% घटाया, सरप्लस रोकने की तैयारी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Tobacco Board का बड़ा फैसला: 2026-27 में FCV फसल का साइज़ 43% घटाया, सरप्लस रोकने की तैयारी

टोबैको बोर्ड (Tobacco Board) ने 2026-27 सीज़न के लिए आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में फ्लेस्ड-क्यूर्ड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू की फसल का साइज़ 43% तक घटाने का फैसला किया है। इस बड़े कदम का मकसद बाज़ार में मौजूद अतिरिक्त सप्लाई को कंट्रोल करना और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना है।

Detailed Coverage

तंबाकू उत्पादन में भारी कटौती

टोबैको बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर 2026-27 सीज़न के लिए फ्लेस्ड-क्यूर्ड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू के उत्पादन साइज़ में 43% की कटौती की है। इस फैसले से आंध्र प्रदेश का उत्पादन कोटा घटकर 81 मिलियन किलो रह गया है, जो पहले 142 मिलियन किलो था। वहीं, कर्नाटक का कोटा भी 100 मिलियन किलो से घटाकर 51 मिलियन किलो कर दिया गया है। यह कदम कई सालों से लाइसेंस प्राप्त किसानों द्वारा की जा रही अतिरिक्त पैदावार और ब्राजील व अफ्रीका जैसे देशों से बढ़ते दबाव के बाद उठाया गया है।

किसानों पर आर्थिक दबाव

इस कटौती के बाद, प्रति क्युरिंग बार्न (curing barn) अनुमत उत्पादन 3,600 किलो से घटकर 2,000 किलो रह गया है। इससे तंबाकू किसानों के लिए आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ गई हैं, क्योंकि बार्न के रखरखाव का फिक्स्ड कॉस्ट (fixed cost) काफी ज़्यादा है। प्रति एकड़ पैदावार कम होने से किसानों के मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका है। हालांकि, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (FAIFA) ने सप्लाई की समस्या को स्वीकार किया है, लेकिन वे सरकार से वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने के लिए समर्थन की मांग कर रहे हैं, जो अधिक स्थिर आय प्रदान कर सकें।

गैर-लाइसेंस प्राप्त उत्पादकों की समस्या

किसानों की एक और बड़ी चिंता गैर-लाइसेंस प्राप्त उत्पादकों (unlicensed growers) की मौजूदगी है। ये लोग लगभग 2 मिलियन किलो तंबाकू बाज़ार में लगभग ₹230 प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। उद्योग के जानकारों का मानना ​​है कि यह अवैध सप्लाई बाज़ार की कीमतों को बिगाड़ रही है और रेगुलेटेड प्रोडक्शन फ्रेमवर्क को कमजोर कर रही है। FAIFA ने अधिकारियों से अवैध ऑपरेशनों से जब्त की गई उपज को टोबैको ग्रोअर्स वेलफेयर फंड (Tobacco Growers’ Welfare Fund) में जमा करने जैसे सख्त प्रवर्तन उपायों की मांग की है।

सरकारी रणनीति और आगे की राह

इन हालात को देखते हुए, आंध्र प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को कृषि समुदाय की मदद के लिए एक मल्टी-फेज रणनीति (multi-phased strategy) तैयार करने का निर्देश दिया है। इस योजना में अल्पावधि राहत (short-term relief) और दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलावों (long-term structural changes) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें बेहतर स्टोरेज समाधानों (storage solutions) की खोज भी शामिल है। ऐसी सुविधाएं किसानों को कम कीमतों के दौरान अपनी उपज को रोकने के लिए अधिक लचीलापन दे सकती हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाला टोबैको बोर्ड भविष्य के प्रोडक्शन कोटे तय करने के लिए वैश्विक कीमतों और मांग के रुझानों की निगरानी करना जारी रखेगा। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये उपाय बाज़ार के सरप्लस को कितनी प्रभावी ढंग से कम करते हैं और फसल विविधीकरण (crop diversification) की पहल इन प्रमुख राज्यों में तंबाकू क्षेत्र के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को कैसे प्रभावित करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.