Telangana सरकार ने चार प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए कर्नाटक से पानी छोड़ने की गुहार लगाई है। इससे **5.5 लाख** एकड़ में खड़ी फसलों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जो राज्य के ग्रामीण इकोनॉमी के लिए बड़ा रिस्क है।
संकट में 5.5 लाख एकड़ फसल
तेलंगाना सरकार ने कर्नाटक प्रशासन से ऊपरी जलाशयों से पानी छोड़ने का आग्रह किया है ताकि निचली सिंचाई परियोजनाओं में पानी की कमी को पूरा किया जा सके। सरकार ने 5,000 क्यूसेक पानी प्रति माह छोड़ने की मांग की है, ताकि Jurala, Nettempadu, Bhima और Koilsagar जैसी परियोजनाओं में स्थिति सुधर सके। जोगुलम्बा गडवाल जिले में स्थिति गंभीर है, जहां पानी के अभाव में फसलें सूखने के कगार पर हैं।
इकोनॉमी पर असर का रिस्क
इस क्षेत्र में कृषि की स्थिरता सीधे ग्रामीण आय से जुड़ी है। फसलों के फेल होने का सीधा असर बीज और उर्वरक जैसे कृषि इनपुट्स की मांग पर पड़ेगा, साथ ही स्थानीय लोगों की डिस्पोजेबल इनकम भी प्रभावित होगी। किसान पहले ही पानी की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो क्षेत्र के एग्रो-इकोनॉमी के लिए दबाव का संकेत है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां
यह मामला जल प्रबंधन की संरचनात्मक कमियों को भी उजागर करता है। Jurala प्रोजेक्ट में सिल्ट (गाद) जमा होने के कारण इसकी जल भंडारण क्षमता काफी घट गई है। इसके अलावा, साल 2027 तक 3 TMC पानी केवल पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के फैसले ने सिंचाई की जरूरतों के लिए लचीलापन कम कर दिया है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रिमोट एरिया में इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता और जल प्रबंधन की वोलेटिलिटी को दिखाती है। अब सबकी नजरें कर्नाटक सरकार के जवाब पर टिकी हैं। अगर पानी समय पर नहीं मिला, तो फसलों के नुकसान का असर सीधे तौर पर कृषि उत्पादन और ग्रामीण क्रय शक्ति (Purchasing Power) पर पड़ना तय है।
