तेलंगाना सरकार ने केंद्र से दालों, मक्का और तिलहन की खरीद सीमा को बढ़ाकर **100%** करने की अपील की है। राज्य ने पहले ही किसानों को राहत देने के लिए **₹6,000 करोड़** से ज्यादा का भारी-भरकम फंड आवंटित किया है, जिससे राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ रहा है।
केंद्र के सामने रखी ये बड़ी मांग
तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर कृषि खरीद की नीति में बदलाव की मांग की है। राज्य सरकार चाहती है कि मौजूदा 25% खरीद सीमा को हटाकर इसे 100% किया जाए ताकि किसानों को सही भाव मिल सके और वे धान जैसी पानी की खपत वाली फसलों से हटकर अन्य फसलों की ओर बढ़ सकें।
राज्य पर वित्तीय बोझ
यह मांग ऐसे समय में आई है जब तेलंगाना सरकार खुद पर भारी वित्तीय बोझ महसूस कर रही है। सेंट्रल सपोर्ट में कमी के कारण, राज्य ने 'TS MARKFED' के जरिए बाजार में हस्तक्षेप किया है और किसानों को फसल की बिक्री के समय भारी नुकसान से बचाने के लिए ₹6,000 करोड़ से ज्यादा खर्च किए हैं। यह सरकारी राशि राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा है, जो दूसरी योजनाओं में इस्तेमाल हो सकती थी।
ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक चुनौतियां
इतने बड़े पैमाने पर खरीद करने के लिए वेयरहाउसिंग, सही हैंडलिंग उपकरण और भंडारण के लिए पर्याप्त बारदाने (gunny bags) की जरूरत होती है। इसके अलावा, राज्य ने ऑयल पाम के लिए प्रति टन ₹25,000 की न्यूनतम कीमत तय करने की मांग की है। तेलंगाना खुद को एडिबल ऑयल का हब बनाना चाहता है, लेकिन इसकी सफलता केंद्र से मिलने वाले सपोर्ट पर टिकी है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
इन्वेस्टर्स को अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर नजर रखनी चाहिए। मार्च 2026 में केंद्र ने ₹894 करोड़ की खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन मक्का और ज्वार पर फैसला अभी बाकी है। 'Price Support Scheme' के दायरे में कोई भी बदलाव फर्टिलाइजर, सीड और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के शेयरों को सीधे प्रभावित करेगा। साथ ही, प्रस्तावित 'Seed Act' कृषि नीति की लंबी अवधि की दिशा तय करेगा।
