Telangana Agriculture Department ने फर्जी SMS को लेकर साइबर क्राइम जांच के आदेश दिए हैं। राज्य के **2,73,128** किसानों को Rythu Bharosa स्कीम के नाम पर गुमराह किया गया है, जिसके बाद सरकारी सिस्टम की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
तेलंगाना एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने सरकारी कम्युनिकेशन सिस्टम में सेंध लगने के बाद साइबर क्राइम विंग से तत्काल जांच की मांग की है। मामला 4 नवंबर, 2026 का है, जब प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 2,73,128 किसानों को ऑटोमेटेड मैसेज मिले, जिसमें दावा किया गया कि उनकी Rythu Bharosa इनपुट सब्सिडी प्रोसेस हो गई है। एग्रीकल्चर डायरेक्टर बी. गोपी ने साफ किया है कि विभाग की तरफ से ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजा गया था और यह पूरी तरह से अनधिकृत (unauthorized) है।
सरकारी सिस्टम की सुरक्षा पर संकट
राज्य सरकार आधिकारिक सूचनाओं के लिए Centre for Development of Advanced Computing (CDAC) के SMS पोर्टल का इस्तेमाल करती है। फिलहाल जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह सरकारी पोर्टल हैक हुआ है या फिर किसी बाहरी हैकर ने गेटवे का इस्तेमाल कर विभाग की आईडी को 'स्पूफ' (spoof) किया है। अधिकारी अभी ट्रांसमिशन लॉग, आईपी एड्रेस और गेटवे एक्सेस पॉइंट्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
किसानों के लिए चिंता की बात
Rythu Bharosa स्कीम किसानों के लिए वित्तीय मदद का एक बड़ा जरिया है, ऐसे में इस तरह के फर्जी मैसेज से कृषि इनपुट प्रोक्योरमेंट के समय किसानों के बीच भारी भ्रम फैल सकता है। विभाग का मुख्य उद्देश्य अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और दोषियों को पकड़ना है।
डिस्क्लेमर: यह एक प्रशासनिक और साइबर सुरक्षा का मामला है। इसका किसी भी शेयर बाजार, लिस्टेड कंपनी या स्टॉक एक्सचेंज से कोई संबंध नहीं है।
