Telangana सरकार अब अपना अलग 'Seed Act' लाने की तैयारी में है। इसका मकसद किसानों को घटिया बीजों से बचाना और पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता (Traceability) लाना है।
नियमों में बड़ा बदलाव
तेलंगाना सरकार ने बीज उत्पादन और बिक्री को विनियमित करने के लिए एक व्यापक स्टेट-लेवल 'Seed Act' को फास्ट-ट्रैक करने का फैसला लिया है। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव के अनुसार, पुरानी व्यवस्था को हटाकर एक नया और पारदर्शी ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि नकली बीजों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान पर लगाम लगाई जा सके।
नई पॉलिसी के तीन मुख्य स्तंभ
- सीड ट्रेसेबिलिटी (Seed Traceability): बीज की शुद्धता को सोर्स पर ही वेरिफाई किया जाएगा।
- डिजिटाइज्ड क्रॉप बुकिंग: पूरा प्रोसेस डिजिटल होगा ताकि किसी भी तरह की हेरफेर की गुंजाइश न रहे।
- कॉन्ट्रैक्ट ओवरसाइट: किसानों और कंपनियों के बीच होने वाले एग्रीमेंट्स पर सरकार की कड़ी निगरानी रहेगी।
निवेशकों और कंपनियों के लिए जोखिम
इस कदम का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जिनका बड़ा प्रोडक्शन बेस तेलंगाना में है। उन्हें अब 'जीरो टॉलरेंस' पॉलिसी के तहत काम करना होगा। अगर कंपनी के बीज मानक के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो उन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, डेटाबेस के साथ सिस्टम को इंटीग्रेट करने के कारण कंपनियों की प्रशासनिक लागत (Administrative Costs) में भी इजाफा तय है।
केंद्र बनाम राज्य का टकराव
दिलचस्प बात यह है कि केंद्र सरकार भी Union Seed Act (2026) पर काम कर रही है। हालांकि, तेलंगाना सरकार का मानना है कि केंद्रीय नियम स्थानीय स्तर पर सुरक्षा देने में पर्याप्त नहीं हो सकते। यह टकराव भविष्य में कानूनी बहस का मुद्दा भी बन सकता है। आने वाले प्लांटिंग सीजन में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां इन सख्त मानकों को कैसे लागू करती हैं और क्या इससे छोटे खिलाड़ियों की सप्लाई चेन प्रभावित होती है।
