तेलंगाना में बारिश की **17%** कमी के कारण किसान संकट में हैं। सरकार से **₹50,000** प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की जा रही है, जिसका असर रूरल कंजम्पशन और बैंकों की लोन रिकवरी पर पड़ सकता है।
फसलों को भारी नुकसान
तेलंगाना का कृषि क्षेत्र अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। अल-नीनो के असर से मॉनसून की बेरुखी ने फसलों को तगड़ी चोट पहुंचाई है। तेलंगाना रायतू संघम और रायतू स्वराज्या वेदिका जैसे किसान संगठनों ने सरकार से धान के लिए ₹30,000 और कपास व मिर्च की फसल के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ तक के मुआवजे की मांग की है। राज्य के करीब 33 जिलों में से आधे सूखे की चपेट में हैं।
सरकार की चेतावनी और रबी सीजन पर असर
भूजल स्तर में भारी गिरावट को देखते हुए सरकार ने रबी सीजन में धान की खेती न करने की सलाह दी है। इससे अब मोटे अनाज और दालों की खेती की ओर रुख करने की चर्चा तेज हो गई है। निवेशकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि इसका सीधा असर एग्रो-इनपुट कंपनियों (खाद, बीज और कीटनाशक) के वॉल्यूम ग्रोथ पर पड़ सकता है।
बैंकिंग सेक्टर पर भी संकट के बादल
रूरल लोन देने वाले बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। यदि फसल की पैदावार गिरती है, तो किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे बैंकों के एनपीए (NPA) में बढ़ोतरी हो सकती है। आने वाले क्वार्टर्स में बैंक प्रोविजनिंग बढ़ा सकते हैं, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर होनी चाहिए।
लंबी अवधि में, राज्य सरकार को खेती के पैटर्न में बदलाव और फसल बीमा जैसी योजनाओं पर जोर देना होगा ताकि भविष्य में मौसम की मार से बचा जा सके।
