Tea Board India: भारतीय चाय की क्वालिटी में आएगा निखार! NCVET से मान्यता प्राप्त टी टेस्टिंग कोर्स शुरू

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Tea Board India: भारतीय चाय की क्वालिटी में आएगा निखार! NCVET से मान्यता प्राप्त टी टेस्टिंग कोर्स शुरू

Tea Board India ने अब चाय की क्वालिटी और ग्लोबल ब्रांडिंग को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, सर्टिफाइड टी टेस्टिंग और सोमेलियर ट्रेनिंग कोर्स की शुरुआत की है। यह पहल विशेष रूप से प्रशिक्षित मानव पूंजी के ज़रिए इंडस्ट्री को वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की ओर ले जाने में मदद करेगी।

चाय की चखने की कला में महारत

Tea Board India ने नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (NCVET) की मंज़ूरी से टी टेस्टिंग में स्किल डेवलपमेंट कोर्स की एक सीरीज़ लॉन्च की है। दार्जिलिंग स्थित टी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में शुरू हुए इन कोर्सेज़ का मकसद भारतीय चाय की क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को और ग्लोबल मार्केट में इसकी पहचान को मज़बूत करने के लिए प्रोफेशनल वर्कफोर्स तैयार करना है।

'एसेंशियल्स ऑफ टी सोमेलियर' का पहला बैच

पहले बैच में 'एसेंशियल्स ऑफ टी सोमेलियर' (Essentials of Tea Sommelier) नाम का 60-घंटे का सर्टिफिकेशन कोर्स शामिल है। इसमें सेंसरी इवैल्यूएशन, ब्लेंडिंग टेक्निक्स, ग्रेडिंग, और कल्टीवेशन व मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस जैसे टेक्निकल पहलू शामिल हैं। इस फॉर्मल एक्रेडिएशन के ज़रिए, Tea Board का लक्ष्य चाय के मूल्यांकन के तरीकों को स्टैंडर्डाइज करना है, जो इंटरनेशनल मार्केट्स में बेहतर कीमत पाने के लिए प्रोड्यूसर्स के लिए एक अहम कदम है।

वैल्यू एडिशन की ओर इंडस्ट्री का झुकाव

यह कदम भारतीय चाय सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां इंडस्ट्री बल्क कमोडिटी सेल्स से हटकर हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही है। McLeod Russel, Goodricke Group, और Jay Shree Tea & Industries जैसी कई भारतीय चाय कंपनियां वोलेटाइल टी प्राइसेस, हाई लेबर कॉस्ट और पारंपरिक मार्केट्स में धीमी एक्सपोर्ट डिमांड जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं।

बेहतर क्वालिटी और प्रीमियम प्रोडक्ट्स बनाने में माहिर प्रोफेशनल्स की फौज तैयार करके, Tea Board कंपनियों को अपने प्रोडक्ट मिक्स को बेहतर बनाने में मदद करना चाहता है। अगर यह सफल होता है, तो बेहतर क्वालिटी वाली ब्रांडिंग से प्रोड्यूसर्स के प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हो सकता है। ऐसे प्रोड्यूसर्स को इनपुट कॉस्ट बढ़ने और क्लाइमेट से जुड़े रिस्क का सामना करना पड़ता है, जो अक्सर असम और वेस्ट बंगाल जैसे प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों में प्रोडक्शन और क्वालिटी को प्रभावित करते हैं।

इंडस्ट्री का सहयोग और भविष्य की ग्रोथ

इस कोर्स का करिकुलम एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (Agriculture Skill Council of India) और मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) के सहयोग से तैयार किया गया है। यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के साथ तालमेल बिठाता है, जिसका लक्ष्य एकेडमिक ट्रेनिंग और इंडस्ट्री की ज़रूरतों के बीच एक ब्रिज बनाना है।

इन्वेस्टर्स को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि क्या ये सर्टिफिकेशन प्रोग्राम भारतीय चाय कंपनियों की एक्सपोर्ट वैल्यू में सुधार लाते हैं। इसके अलावा, हार्वेस्ट क्वालिटी पर क्लाइमेट का असर, ऑक्शन प्राइसेस में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई चेन की डायनामिक्स जैसे फैक्टर्स पर भी ध्यान देना ज़रूरी होगा। इन प्रोफेशनल्स के बड़े चाय उत्पादकों और एक्सपोर्टर्स की वैल्यू चेन में इंटीग्रेशन पर ही कंपनी की लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.