तमिलनाडु सरकार ने राज्य के **20 लाख** किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक एग्रीकल्चर गाइडेंस ब्यूरो लॉन्च किया है। इसका मकसद FPOs को बेहतर मार्केट एक्सेस और एक्सपोर्ट के अवसर दिलाना है।
तमिलनाडु सरकार ने कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए एग्रीकल्चर गाइडेंस ब्यूरो की शुरुआत की है। जिस तरह राज्य में 'इंडस्ट्रियल गाइडेंस ब्यूरो' काम करता है, उसी तर्ज पर यह नया विभाग Farmer Producer Organizations (FPOs) और खरीदारों के बीच एक सेतु (bridge) का काम करेगा। इसका मुख्य लक्ष्य पारंपरिक खेती को 'मार्केट-ड्रिवन' मॉडल में बदलना है, ताकि किसान डिमांड, प्राइस फोरकास्टिंग और एक्सपोर्ट क्वालिटी पर ध्यान दे सकें।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स का सहारा
सब्जियों और फलों जैसी जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार एक पायलट प्रोजेक्ट लाई है। इसके तहत रेफ्रिजरेटेड वाहनों की खरीद पर 50% तक बैक-एंड सब्सिडी दी जाएगी। इस कदम से FPOs अपना कोल्ड-चेन नेटवर्क मजबूत कर पाएंगे और दूर-दराज के बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकेंगे।
वर्किंग कैपिटल की चुनौती
लॉजिस्टिक्स में सुधार के बावजूद, FPOs के सामने वर्किंग कैपिटल की भारी किल्लत एक बड़ा जोखिम है। सीजन के समय जब इन संगठनों को किसानों से फसल खरीदनी होती है, तब उन्हें समय पर और सस्ता फंड नहीं मिल पाता। पूंजी की इस कमी के कारण वे बड़े एग्रीगेटर्स के साथ मुकाबला करने में पिछड़ जाते हैं।
वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स और एक्सपोर्ट पर जोर
मुनाफा बढ़ाने के लिए सरकार अब GI (Geographical Indication) टैग वाले उत्पादों और ऑर्गेनिक ब्रांडिंग को बढ़ावा दे रही है। NABARD और CII मिलकर GI-टैग वाले माल को मुख्य सप्लाई चेन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या नई सब्सिडी और सरकारी मदद से इन संगठनों को बैंकों से आसान लोन मिल पाता है या नहीं, क्योंकि यही इनकी सफलता की असली कुंजी होगी।
