तमिलनाडु में चावल की रिटेल कीमतों में **₹15** से **₹30** प्रति किलो का जबरदस्त इजाफा हुआ है। राज्य में धान की खेती में आई गिरावट और किसानों की बढ़ती लागत के चलते आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
उत्पादन में भारी कमी का असर
तमिलनाडु में पिछले कुछ हफ्तों में चावल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य में धान की खेती का रकबा 1970-71 के 27 लाख हेक्टेयर से घटकर 2024-25 में महज 19 लाख हेक्टेयर रह गया है। वहीं, औसत पैदावार 3,200 से 3,300 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर अटकी हुई है, जो पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की तुलना में काफी कम है। इस कमी को पूरा करने के लिए राज्य को अब आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
क्यों बढ़ रही है खेती की लागत?
किसानों के लिए खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। 2024-25 में धान की खेती की लागत ₹99,902 प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। मजदूरी, मशीनरी और सिंचाई के बढ़ते खर्चों के सामने अगर किसानों को सही दाम नहीं मिलता, तो वे इस फसल से मुंह मोड़ रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
खाद्य महंगाई का यह ट्रेंड सीधे तौर पर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) को प्रभावित करता है, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों पर असर डाल सकता है। इतना ही नहीं, FMCG सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो रही है। अब बाजार की नजरें सरकार के उन निवेशों पर हैं, जो सिंचाई और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए किए जाने हैं।
