Coordination Committee of All Farmers' Associations of Tamil Nadu ने कर्नाटक के प्रस्तावित Mekedatu dam के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट बिना अंतर-राज्य सहमति के बनाया जा रहा है, जो खेती के पानी पर संकट पैदा करेगा।
कावेरी नदी पर कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित Mekedatu dam परियोजना के विरोध में तमिलनाडु के किसानों ने 20 सितंबर, 2026 से राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। यह फैसला गुरुग्राम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ किसान नेताओं की 5 घंटे लंबी बैठक के बाद लिया गया है।
विरोध की मुख्य वजहें
किसान संघ के अध्यक्ष पी.आर. पांडियन के अनुसार, यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से गैर-कानूनी है क्योंकि इसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी या कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (Cauvery Water Management Authority) की कोई सहमति नहीं ली गई है। किसानों का दावा है कि कर्नाटक द्वारा जमा की गई विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में खामियां हैं और यह निचले इलाकों में खेती पर पड़ने वाले बुरे असर को नजरअंदाज करती है।
केवल डैम ही नहीं, MSP पर भी दबाव
केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक में किसानों ने सिर्फ डैम का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि अपनी पुरानी मांगों को भी दोहराया। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- कृषि उपज के लिए MSP (Minimum Support Price) की कानूनी गारंटी।
- एम.एस. स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करना।
- स्मार्ट बिजली मीटर और भूमि अधिग्रहण अधिनियम (Land Acquisition Act) के विवादित प्रावधानों को वापस लेना।
निवेशकों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर असर
इस आंदोलन के चलते स्थानीय परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों में व्यवधान आ सकता है। बाजार और क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों की नजर अब केंद्र सरकार के जवाब और प्रोजेक्ट को मिलने वाली नियामक मंजूरी (Regulatory Clearances) पर टिकी है। किसी भी प्रकार का अंतर-राज्य तनाव क्षेत्र में चल रही इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समय सीमा को प्रभावित कर सकता है।
