तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (TNAU) ने आने वाले फसल सीजन के लिए मूंगफली की कीमतों पर बड़ा अनुमान जताया है। TNAU के मुताबिक, किसानों को **₹65 से ₹70 प्रति किलो** का भाव मिल सकता है। यह अनुमान पिछले **25 सालों** के मार्केट डेटा पर आधारित है और मॉनसून की अनिश्चितता के चलते सप्लाई में संभावित चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
मूंगफली के भावों पर TNAU की पैनी नजर
तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (TNAU) ने आने वाले फसल सीजन के लिए मूंगफली की कीमतों पर एक महत्वपूर्ण अनुमान जारी किया है। यूनिवर्सिटी के डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट इंटेलिजेंस सेल (DEMIC) के अनुसार, किसानों को आगामी सीजन में ₹65 से ₹70 प्रति किलो का भाव मिलने की उम्मीद है। यह अनुमान पिछले 25 सालों के मार्केट डेटा के गहन विश्लेषण पर आधारित है, जिसे तिनदिवनम और सेवुुर जैसे प्रमुख विनियमित बाजारों से जुटाया गया है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण, मार्केट के लिए भी अहम
हालांकि यह अनुमान मुख्य रूप से किसानों को उनकी फसल की योजना बनाने में मदद करने के लिए है, लेकिन यह कृषि कमोडिटी मार्केट के लिए एक अहम संकेतक के तौर पर भी काम करेगा। भारत दुनिया के अग्रणी मूंगफली उत्पादकों में से एक है और एडिबल ऑयल (खाने वाले तेल) व पशु आहार (लाइवस्टॉक फीड) सप्लाई चेन में इसकी अहम भूमिका है। साल 2024-25 के सीजन में, देश में लगभग 119.42 लाख टन मूंगफली की फसल 57.62 लाख हेक्टेयर से काटी गई थी।
मॉनसून की मार और सप्लाई पर असर
इस सीजन में खेती के रकबे में बढ़ोतरी के बावजूद, बाजार की उम्मीदें उत्पादन में गिरावट की ओर इशारा कर रही हैं। बुवाई क्षेत्र और अपेक्षित फसल के बीच इस अंतर का कारण हाल के मॉनसून पैटर्न में आई अस्थिरता को बताया जा रहा है। इस तरह की अप्रत्याशित बारिश से सप्लाई साइकिल बाधित हो सकती है, जिसका असर न केवल मूंगफली की उपलब्धता पर पड़ेगा, बल्कि इस फसल पर निर्भर प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के लिए कीमतों के उतार-चढ़ाव को भी प्रभावित करेगा।
निवेशकों के लिए क्यों है खास?
FMCG और कृषि क्षेत्र पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए मूंगफली की कीमतों का रुझान बहुत मायने रखता है। यह फसल एडिबल ऑयल इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल का एक प्रमुख स्रोत है, और इसका उप-उत्पाद, ऑयलकेक, पशुओं के चारे के बाजार में प्रोटीन का एक अहम हिस्सा है। जब कच्चे माल की लागत बदलती है, तो इन सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
आगे क्या?
तमिलनाडु राज्य, खासकर तिरुवन्नामलाई, नमक्कल, विल्लुपुरम, सेलम, कुड्डालोर और अरियालुर जैसे जिलों में मूंगफली उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। तेल निकालने और सीधे उपभोग के लिए इसकी प्रोसेसिंग एक बड़े पैमाने का कारोबार है, इसलिए इन सप्लाई चेनों की स्थिरता मौसम के परिणामों से जुड़ी हुई है। आने वाले महीनों में बाजार सहभागियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वास्तविक उत्पादन का आंकड़ा इन अनुमानों के मुकाबले कैसा रहता है, क्योंकि यही तय करेगा कि डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज पर कीमतों का कितना दबाव पड़ेगा।
