Tamil Nadu Agricultural University (TNAU) ने 2026 के नॉर्थ-ईस्ट मानसून के लिए **468 mm** बारिश का अनुमान लगाया है। चिंता की बात यह है कि तटीय इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी, जबकि अंदरूनी जिलों में सूखे के हालात बन सकते हैं, जिससे खेती और ग्रामीण डिमांड पर असर पड़ सकता है।
असमान बारिश और खेती पर असर
TNAU के अनुसार, इस साल मानसून का आंकड़ा औसतन 464 mm से बढ़कर 468 mm रहने की उम्मीद है। हालांकि, यह 'औसत' पूरे राज्य की तस्वीर नहीं दिखाता। मयिलादुथुराई और चेंगलपट्टू जैसे तटीय जिलों में सामान्य से 9% ज्यादा बारिश का अनुमान है। वहीं, कल्लाकुरिची, कृष्णगिरि और पुदुकोट्टई जैसे अंदरूनी इलाकों में 9% की कमी देखी जा सकती है। तमिलनाडु में धान, गन्ना और दालों की खेती काफी हद तक इस मानसून पर टिकी है, ऐसे में यह असंतुलन फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकता है।
मानसून और मार्केट का कनेक्शन
इस साल मानसून में बदलाव की मुख्य वजह 'अल नीनो' (El Nino) की स्थिति है, जो चक्रवातों का खतरा बढ़ा रही है। तटीय इलाकों में भारी बारिश से जहां फसलों के नुकसान और इंश्योरेंस क्लेम का दबाव बढ़ सकता है, वहीं अंदरूनी इलाकों में पानी की कमी से किसानों को खेती के पुराने और कठिन तरीकों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए सबक
ग्रामीण बाजारों और एग्री-इनपुट कंपनियों (जैसे खाद, बीज और कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां) के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। जिन कंपनियों का नेटवर्क इन प्रभावित जिलों में ज्यादा है, उन्हें वहां की मिट्टी की नमी और सिंचाई की जरूरतों पर नजर रखनी होगी। आने वाले अक्टूबर से दिसंबर के महीनों में जलाशयों का जलस्तर और सरकारी फसल सलाह (Crop Advisories) बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
