TN Monsoon Outlook: तमिलनाडु में मानसून पर टिकीं नजरें, एग्रीकल्चर और इंडस्ट्री के लिए बढ़ा खतरा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
TN Monsoon Outlook: तमिलनाडु में मानसून पर टिकीं नजरें, एग्रीकल्चर और इंडस्ट्री के लिए बढ़ा खतरा

तमिलनाडु अब अपने महत्वपूर्ण नॉर्थ-ईस्ट मानसून (North-east Monsoon) के दौर में प्रवेश कर चुका है। साउथ-वेस्ट मानसून की कमजोरी के बाद, अब राज्य की रबी फसलों और चेन्नई के मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए यह बारिश जीवनरेखा बनी हुई है। निवेशकों को जलाशयों के लेवल पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

तमिलनाडु के लिए अक्टूबर से दिसंबर तक का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि राज्य अपनी सालाना पानी की जरूरतों का करीब 50% इसी मानसून चक्र से पूरा करता है। हालांकि, इस साल साउथ-वेस्ट मानसून के कमजोर रहने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिसके चलते प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर औसत से काफी नीचे है।\n\n### खेती और फूड इंफ्लेशन का रिस्क\n\nइस मानसून की सफलता पर ही राज्य की रबी क्रॉपिंग सीजन की फसलें निर्भर हैं। यदि बारिश उम्मीद से कम होती है, तो पानी की भारी कमी हो सकती है। सरकार को तब ड्रिंकिंग वॉटर को प्राथमिकता देनी होगी, जिससे सिंचाई के लिए पानी की कटौती हो सकती है। इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।\n\n### चेन्नई के मैन्युफैक्चरिंग हब पर संकट\n\nचेन्नई का मैन्युफैक्चरिंग बेल्ट ऑटोमोटिव, टेक्सटाइल और केमिकल इंडस्ट्रीज का बड़ा केंद्र है, जिन्हें भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। यदि मानसून ने साथ नहीं दिया, तो इन कंपनियों के लिए पानी की लागत बढ़ सकती है। बाहरी स्रोतों से महंगा पानी खरीदना या फिर प्रोडक्शन घटाना कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।\n\n### 'अल नीनो' से बढ़ी अनिश्चितता\n\nमौसम विभाग इस बार 'अल नीनो' (El Niño) के असर को लेकर भी अलर्ट है। प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव की आशंका बनी हुई है। इस क्लाइमेट अनिश्चितता के चलते बिजनेस और सरकार को हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।\n\nनिवेशकों को अब इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) की रिपोर्ट और राज्य के जलाशयों में पानी की बढ़त पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले हफ्तों में चेन्नई के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से प्रोडक्शन स्लोडाउन की खबरें मार्केट सेंटीमेंट तय कर सकती हैं।

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