GM Basmati Rice: सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका, बासमती एक्सपोर्ट पर मंडराया संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
GM Basmati Rice: सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका, बासमती एक्सपोर्ट पर मंडराया संकट

एक्टिविस्ट अरुणा रोड्रिग्स ने हर्बिसाइड-टॉलरेंट GM बासमती चावल की मंजूरी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की है। आरोप है कि सरकार ने GM फसलों के लिए **2024** के अनिवार्य नीतिगत आदेश का उल्लंघन किया है, जिससे देश के अरबों डॉलर के बासमती चावल एक्सपोर्ट मार्केट पर बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही में तत्काल सुनवाई की मांग की है। यह मामला मुख्य रूप से जुलाई 2024 के उस न्यायिक आदेश के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें सरकार को किसी भी तरह की कमर्शियल रिलीज से पहले GM फसलों पर एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार करने और स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श करने का निर्देश दिया गया था।\n\nयाचिका में 'RobiNOweed' ब्रांड और 'Kamla' या 'DRR Rice 100' जैसे जीन-एडिटेड चावल के अनावरण पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सरकार ने अदालत के उन आश्वासनों को दरकिनार कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि जब तक एक औपचारिक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार नहीं हो जाता, तब तक किसी भी तरह की एनवायर्नमेंटल रिलीज नहीं की जाएगी।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?\n\nयह कानूनी लड़ाई एग्री-सेक्टर के लिए बड़ी अनिश्चितता लेकर आई है। भारत का बासमती चावल एक्सपोर्ट मार्केट $12 बिलियन से अधिक का है। जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आनुवंशिक संदूषण (Genetic Contamination) का डर सताता है, तो भारत की नॉन-GMO बासमती एक्सपोर्टर की छवि को भारी नुकसान हो सकता है।\n\nइस मामले में पर्यावरण मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमिटी (GEAC) जैसे सरकारी निकायों को पक्षकार बनाया गया है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट इन स्ट्रेन्स की खेती पर कोई स्टे (Stay) लगाता है। कोई भी न्यायिक हस्तक्षेप एग्री-टेक कंपनियों के भविष्य के प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल टाइमलाइन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

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