Sunkind India अब राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में एग्रीवोल्टेइक प्रोजेक्ट्स (Agrivoltaic Projects) लॉन्च कर रही है। यह कदम कंपनी को सोलर एनर्जी को खेती के साथ जोड़ने का मौका देगा और अपने बिजनेस मॉडल में एक नया आयाम जोड़ेगा, वह भी पब्लिक लिस्टिंग से ठीक पहले।
खेती पर सोलर का साया
Sunkind India Limited ने अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब एग्रीवोल्टेइक प्रोजेक्ट्स में उतर रही है। यह एक ऐसा मॉडल है जहां सोलर एनर्जी प्रोडक्शन को सीधे खेती के साथ जोड़ा जाएगा। गुरुग्राम की यह कंपनी खेतों के ऊपर सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर लगाएगी, जिससे किसानों को कमाई का दोहरा जरिया मिलेगा और जमीन का बेहतर इस्तेमाल होगा।
कंपनी फिलहाल राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में ऐसे प्रोजेक्ट्स को लेकर बातचीत कर रही है। यह कदम Sunkind को सिर्फ सोलर स्ट्रक्चर सप्लायर से एक कम्प्लीट प्रोजेक्ट पार्टनर के तौर पर स्थापित करेगा।
सोलर और खेती का इंटीग्रेशन
एग्रीवोल्टेक्स में, सोलर पैनल को इस तरह लगाया जाता है कि नीचे फसलें भी उग सकें। इससे बड़ी सोलर परियोजनाओं से जुड़ी जमीन के इस्तेमाल की चिंताओं को दूर किया जा सकता है। किसानों के लिए, यह सोलर एनर्जी प्रोडक्शन या जमीन लीज के जरिए कमाई का एक स्थिर जरिया बन सकता है। इस पहल का मकसद सोलर पैनलों को साफ करने के लिए जरूरी पानी का इस्तेमाल सिंचाई में भी करना है, जिससे किसानों की लागत कम हो सके। कंपनी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM Kusum) जैसी सरकारी योजनाओं का फायदा उठाकर किसानों को 25 से 30 साल तक की लंबी और अनुमानित आय देना चाहती है।
बिजनेस का विस्तार और बैकग्राउंड
यह कदम Sunkind के रिन्यूएबल एनर्जी क्षमताओं के विस्तार का हिस्सा है। जुलाई 2026 तक, कंपनी ने छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों में लगभग 250 MWp के डिस्ट्रीब्यूटेड ओपन-एक्सेस सोलर ईपीसी (EPC) ऑर्डर हासिल किए थे। इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, कंपनी राजस्थान के जयपुर में 1 GW का सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी लगा रही है। यह वर्टिकल इंटीग्रेशन बाहरी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने और प्रोजेक्ट लागत को बेहतर ढंग से मैनेज करने के लिए है।
एग्जीक्यूशन और रेगुलेटरी पहलू
एग्रीवोल्टेक्स और मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार से कमाई के स्रोत तो बढ़ेंगे, लेकिन नई ऑपरेशनल चुनौतियां भी आएंगी। स्ट्रक्चर सप्लाई से फुल-स्केल सोलर प्रोजेक्ट्स को एग्जीक्यूट करने के लिए काफी पूंजी और ऑपरेशनल निगरानी की जरूरत होगी। इसके अलावा, PM Kusum से जुड़े मॉडल की सफलता सरकारी नीतियों की निरंतरता और ऊर्जा-कृषि फ्रेमवर्क के कुशल कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।
कंपनी की यह स्ट्रेटेजिक प्लानिंग ऐसे समय में हो रही है जब वह कैपिटल मार्केट्स में अपने भविष्य की तैयारी कर रही है। Sunkind India को फरवरी 2026 में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि कंपनी अभी भी एक अनलिस्टेड एंटिटी है। कंपनी की प्रगति में रुचि रखने वाले निवेशकों को नए जयपुर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के कॉपमिशनिंग टाइमलाइन और हाल ही में हासिल किए गए 250 MWp प्रोजेक्ट पाइपलाइन के सफल एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी चाहिए। एग्रीवोल्टेइक मॉडल की लॉन्ग-टर्म स्केलेबिलिटी भी कंपनी की जमीन मालिकों के साथ विश्वास बनाने और डुअल-यूज़ लैंड प्रोजेक्ट्स की जटिलताओं को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
