चाय बागान मालिकों की गुहार: कीटनाशक नियमों पर रोक नहीं तो नहीं बेच पाएंगे पत्तियां!

AGRICULTURE
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
चाय बागान मालिकों की गुहार: कीटनाशक नियमों पर रोक नहीं तो नहीं बेच पाएंगे पत्तियां!

असम और पश्चिम बंगाल के छोटे चाय उत्पादक मुश्किल में हैं। Tata Consumer Products और Hindustan Unilever जैसी बड़ी कंपनियां कीटनाशक (Pesticide) के सख्त नियमों का हवाला देकर पत्तियां खरीदने से मना कर रही हैं। FSSAI के नए नियमों के कारण सप्लाई चेन (Supply Chain) में दिक्कत आ रही है और किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

क्यों हो रही हैं पत्तियां रिजेक्ट?

भारत की प्रमुख चाय कंपनियों, जिनमें Tata Consumer Products Ltd (TCPL) और Hindustan Unilever Ltd (HUL) शामिल हैं, ने अपने खरीद मानकों को कड़ा कर दिया है। टी बोर्ड ऑफ इंडिया (Tea Board of India) के दिशानिर्देशों के बाद, ये कंपनियां अब उन हरी चाय की पत्तियों को रिजेक्ट कर रही हैं जो भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कीटनाशक अवशेषों (Pesticide Residues) से जुड़े मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इस सख्ती के कारण पीक प्रोडक्शन सीजन में भारी दिक्कतें आ रही हैं और कई छोटे किसान अपनी फसल बेचने में असमर्थ हैं।

क्या है विवाद की जड़?

असली समस्या FSSAI के मार्च 2024 के उस निर्देश के लागू होने से जुड़ी है, जिसमें छह खास कीटनाशकों के टेस्ट की बात कही गई है। छोटे उत्पादकों का संगठन, Confederation of Small Tea Growers Associations (CISTA), का कहना है कि यह नियम लागू करना अव्यावहारिक (Impractical) है। उनका तर्क है कि FSSAI ने अभी तक इन केमिकल्स के लिए न्यूनतम अवशेष सीमा (Minimum Residue Limits - MRLs) को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई नहीं किया है। ऐसे में, 0.01 mg/kg की एक डिफॉल्ट और सख्त सीमा लागू की जा रही है, जिसके कारण बहुत से किसान, जिनके पास लोकल टेस्टिंग की सुविधा नहीं है, अनुपालन (Compliance) नहीं कर पा रहे हैं।

आगे क्या?

किसान नियामक सैंपलिंग (Regulatory Sampling) से हटकर सर्विलांस सैंपलिंग (Surveillance Sampling) पर जाने की वकालत कर रहे हैं, जिसका उपयोग डेटा कलेक्शन के लिए होता है। इसके अलावा, कुछ किसान संगठनों ने मोनोक्रोटोफोस (Monocrotophos) जैसे जहरीले कीटनाशक पर बैन लगाने की मांग की है, जिसके सैंपल कथित तौर पर उत्तरी बंगाल से मिले हैं। पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय के साथ एक मीटिंग तय है, जहां इन चिंताओं पर चर्चा की जाएगी और किसानों के लिए राहत पर विचार किया जाएगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

यह स्थिति भारतीय कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में फूड सेफ्टी (Food Safety) और क्वालिटी कंट्रोल (Quality Control) पर बढ़ते फोकस को दिखाती है। TCPL और HUL जैसी कंपनियां नए हेल्थ रेगुलेशन (Health Regulations) और ग्राहकों की उम्मीदों के अनुसार चलने के लिए अनुपालन को प्राथमिकता दे रही हैं। हालांकि इससे प्रोडक्ट सेफ्टी सुनिश्चित होती है, लेकिन अल्पावधि (Short Term) में सप्लाई चेन में अस्थिरता (Volatility) आ सकती है। इंडस्ट्री की यह क्षमता कि वह सख्त क्वालिटी की जरूरतों और छोटे किसानों की जमीनी हकीकत के बीच संतुलन कैसे बिठाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य में टेस्टिंग प्रोटोकॉल में संभावित बदलाव या किसानों के लिए टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के सरकारी प्रयास, इन क्षेत्रों में चाय खरीद की दीर्घकालिक स्थिरता (Long-term Stability) तय कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.