Seed Bill: जीन एडिटिंग को मिलेगी कानूनी मंजूरी? खेती में क्रांति की तैयारी!

AGRICULTURE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Seed Bill: जीन एडिटिंग को मिलेगी कानूनी मंजूरी? खेती में क्रांति की तैयारी!

देश के कृषि उद्योग से जुड़े बड़े नेता चाहते हैं कि आने वाले सीड बिल में जीन एडिटिंग (Gene Editing) को कानूनी मान्यता मिले। इससे नई फसलें तेज़ी से विकसित हो सकेंगी और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों को अपनाने में सालों से आ रही कानूनी दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।

सीड बिल में क्यों हो जीन एडिटिंग?

खेती-किसानी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सीड बिल में जीन एडिटिंग जैसी नई तकनीकों के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार होता है, तो सरकार नई किस्मों को विकसित करने में लगने वाले समय को काफी कम कर सकती है। अभी एक नई फसल विकसित करने में 10 से 15 साल लग जाते हैं, लेकिन जीन एडिटिंग से यह प्रक्रिया छोटी हो सकती है।

यह मांग ऐसे समय में आई है जब भारत पर कृषि उत्पादन बढ़ाने का दबाव है। खासकर, वैश्विक कपास उत्पादन में भारत की गिरती स्थिति और कुछ फसलों के लिए आयात पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय है। 'ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS)' जैसे संगठनों के विशेषज्ञों का मानना है कि खेती को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विज्ञान पर आधारित नियमों में सुधार ज़रूरी है।

पुरानी मुश्किलें और सरकारी चुनौती

उद्योग की यह मांग इसलिए उठ रही है क्योंकि भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों को लेकर नियम-कानून काफी जटिल रहे हैं। साल 2002 से GM बीज को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया धीमी और विवादों भरी रही है, जिसके कारण दूसरे बड़े कृषि देशों की तुलना में इसका कमर्शियल इस्तेमाल बहुत सीमित रहा है। अगर बिल में जीन एडिटिंग और ट्रांसजेनिक टेक्नोलॉजी को अलग-अलग रखा जाता है, तो उद्योग को उम्मीद है कि इनोवेशन के लिए एक आसान और भरोसेमंद रास्ता खुलेगा।

हालांकि, सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। 'भारतीय किसान संघ' जैसे कई समूह सीड बिल के किसी भी हिस्से में ट्रांसजेनिक सामग्री शामिल करने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। यह दिखाता है कि सरकार को कृषि टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने और किसान संगठनों की चिंताओं को संतुलित करने का मुश्किल काम करना होगा।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

खबरों के मुताबिक, सीड बिल का मसौदा तैयार है और संसद में पेश होने से पहले बस राजनीतिक मंजूरी का इंतज़ार है। निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि बिल के अंतिम मसौदे में क्या लिखा है। जीन-एडिटेड फसलों के लिए खास प्रावधानों को शामिल किया जाना या न किया जाना, भारत में बीज कंपनियों के रिसर्च बजट और संभावित कमर्शियल लॉन्च के समय को तय करेगा। इसके अलावा, निवेशक बड़ी घरेलू और मल्टीनेशनल बीज कंपनियों के मैनेजमेंट से यह जानने की कोशिश करेंगे कि स्पष्ट नियमों के बाद वे इन तकनीकों को लागू करने के लिए कितने तैयार हैं। सरकार का उद्योग विशेषज्ञों और किसान समूहों की अलग-अलग मांगों को कैसे सुलझाना है, यह बिल के दीर्घकालिक असर के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.