सेक्टर में आई तेजी, जबकि मार्केट में गिरावट
1 फरवरी 2025 को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट पेश किया, तो भारतीय सीफूड प्रोसेसर्स के शेयरों ने निवेशकों का ध्यान खींचा। Apex Frozen Foods के शेयर में करीब 4.17% की बढ़त दर्ज की गई, वहीं Waterbase 2.62% और Zeal Aqua 6.64% चढ़ गया। यह उछाल तब आया जब मार्केट के बड़े इंडेक्स BSE Sensex में 0.82% की गिरावट और NSE Nifty में भी गिरावट देखी गई। असल में, बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी ने बड़े पैमाने पर बिकवाली को बढ़ावा दिया था, लेकिन सीफूड सेक्टर में आई यह तेजी खास सरकारी एलान का नतीजा थी।
ड्यूटी-फ्री आयात में छूट से एक्सपोर्ट पोटेंशियल को बढ़ावा
इस सेक्टर में आई तेजी की मुख्य वजह बजट में हुए एलान थे। सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए सीफूड प्रोडक्ट्स की प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री आयात की सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। यह सीमा मौजूदा 1% से बढ़ाकर पिछले साल के एक्सपोर्ट टर्नओवर के Free On Board (FOB) वैल्यू का 3% कर दी गई है। इस कदम से एक्सपोर्टर्स के लिए इनपुट कॉस्ट कम होगी, जिससे उनकी मार्जिन बढ़ेगी और वे ग्लोबल मार्केट में ज्यादा कॉम्पिटिटिव बन सकेंगे। इसके अलावा, सरकार ने 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट के साथ-साथ तटीय इलाकों में फिशरीज़ वैल्यू चेन को मजबूत करने और स्टार्ट-अप्स, महिला समूहों और फिश फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस के लिए मार्केट लिंकेज को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव दिया है।
कंपनियों के फाइनेंशियल फुटप्रिंट्स और मार्केट का हाल
अगर इन कंपनियों के फाइनेंशियल फुटप्रिंट्स की बात करें, तो Apex Frozen Foods, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹913-964 करोड़ है, 40-46 के P/E रेशियो पर काम कर रही है। वहीं, Zeal Aqua, जिसकी वैल्यू करीब ₹127-133 करोड़ है, 7.8 से 12.6 के P/E रेशियो के बीच ट्रेड कर रही है। दूसरी ओर, Waterbase की मार्केट कैप ₹183 करोड़ से ₹310 करोड़ के बीच है, लेकिन इसका P/E रेशियो नेगेटिव है, जो बताता है कि कंपनी फिलहाल नुकसान में चल रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Waterbase को ऑपरेटिंग लॉस और घटते परफॉर्मेंस जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिस वजह से कुछ एनालिस्ट ने इसे 'स्ट्रॉन्ग सेल' रेटिंग भी दी है। इसके विपरीत, Apex Frozen Foods ने अपनी मार्केट डाइवर्सिफिकेशन की मदद से फाइनेंशियल ईयर 26 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 19% का शानदार ईयर-ऑन-ईयर रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया था।
एक्सपोर्ट सिनेरियो और सेक्टर आउटलुक
2025 में भारतीय सीफूड एक्सपोर्ट का परिदृश्य लगातार बदलता रहा। अमेरिका एक बड़ा मार्केट बना रहा, लेकिन अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण भारतीय झींगा निर्यात (shrimp exports) के ट्रेड फ्लो में बदलाव आया। नतीजतन, एक्सपोर्ट्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चीन और यूरोपीय संघ की ओर डायवर्ट किया गया। यह स्ट्रेटेजिक शिफ्ट सीफूड सेक्टर की मजबूती और ट्रेड प्रेशर को झेलने की क्षमता को दर्शाता है। बजट में प्रस्तावित रियायतों से एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। ऐतिहासिक रूप से, भारत के सीफूड और एक्वाकल्चर सेक्टर्स ने बजट में घोषित सरकारी नीतियों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई है। पिछले बजटों में भी ऐसे ही एलान के बाद संबंधित शेयरों में तेजी देखी गई थी। वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और मार्केट लिंकेज को मजबूत करने पर केंद्रित मौजूदा पॉलिसी दिशा, इंडस्ट्री की एक्सपोर्ट आय बढ़ाने की महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप है, जिसके लिए आने वाले सालों में महत्वपूर्ण वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। बजट 2025 में पेश किए गए उपायों को इन उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जो उन कंपनियों के लिए निरंतर तेजी ला सकते हैं जो बेहतर आयात शर्तों और मजबूत वैल्यू चेन इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठा सकती हैं।