SML Limited अब सल्फर को एक प्रमुख फसल पोषक तत्व के रूप में पेश कर रही है। कंपनी अपनी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से पैदावार बढ़ाने पर जोर दे रही है, लेकिन बिना सरकारी सब्सिडी के NPK फर्टिलाइजर्स के सामने इसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
SML Limited, जिसे पहले 'सल्फर मिल्स लिमिटेड' के नाम से जाना जाता था, भारतीय कृषि क्षेत्र में सल्फर की अहमियत को पूरी तरह बदलने की कोशिश कर रही है। अब तक इसे केवल एक रिफाइनरी बाई-प्रोडक्ट माना जाता था, लेकिन कंपनी इसे मिट्टी की सेहत और फसल की उत्पादकता के लिए एक अनिवार्य तत्व (Core Nutrient) के रूप में स्थापित कर रही है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पूरा कृषि जगत नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश (NPK) जैसे सब्सिडी वाले उर्वरकों से हटकर बेहतर विकल्प तलाश रहा है।
नई टेक्नोलॉजी का सहारा
कंपनी ने अपने 'वॉटर डिस्पर्सिबल ग्रेन्यूल्स' (WDG) जैसे हाई-एफिशिएंसी प्रोडक्ट्स के जरिए बाजार में पकड़ मजबूत करने की तैयारी की है। अपनी प्रोप्राइटरी 'पार्टिकल-रिडक्शन टेक्नोलॉजी' के माध्यम से कंपनी का लक्ष्य किसानों को ऐसे समाधान देना है, जिनसे फसल की पोषक तत्व सोखने की क्षमता बढ़े और बर्बादी कम हो।
सरकारी सब्सिडी की राह में रोड़ा
चुनौतियां भी कम नहीं हैं। NPK उर्वरकों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जिससे वे सस्ते होते हैं। सल्फर को आधिकारिक तौर पर 'प्रमुख पोषक तत्व' का दर्जा न मिलने के कारण इसे सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता। यही कारण है कि कंपनी को अपनी तकनीक और उत्पादों की बेहतर क्वालिटी साबित करके किसानों का भरोसा जीतना पड़ रहा है, क्योंकि किसान हमेशा कम कीमत वाले विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं।
रिस्क और ब्रांडिंग
दुनिया के 80 से अधिक देशों में सक्रिय रहने के कारण कंपनी ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में होने वाली उठा-पटक और जियो-पॉलिटिकल तनावों के प्रति संवेदनशील है। वहीं, एग्रोकेमिकल सेक्टर में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा भी मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। अपने ब्रांड को भरोसेमंद बनाने के लिए कंपनी ने जुलाई 2026 में सचिन तेंदुलकर को अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। अब देखना यह है कि कंपनी अपनी सस्टेनेबिलिटी और कार्बन एमिशन टारगेट्स के साथ बाजार में अपनी जगह कितनी मजबूती से बना पाती है।
