मानसून की बेरुखी ने राजस्थान की कमर तोड़ दी है। जोधपुर जोन में जलाशयों का स्तर पिछले साल के **80.2%** के मुकाबले लुढ़ककर मात्र **15.7%** रह गया है, जिससे रबी की बुवाई में देरी और चारे की कीमतों में भारी उछाल आया है।
राजस्थान में कमजोर मानसून के कारण कृषि आधारित अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 200 से ज्यादा बांध फिलहाल पूरी तरह खाली हो चुके हैं, जिससे सिंचाई और पेयजल की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
कृषि और पशुपालन पर असर
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिमी राजस्थान में 30% बारिश की कमी दर्ज की है, जबकि जालौर और पाली जैसे जिलों में यह कमी 50% से भी ज्यादा है। जैसलमेर जैसे इलाकों में रबी फसलों की बुवाई नामुमकिन सी हो गई है। इसका सीधा असर पशुपालन पर भी पड़ा है, जो ग्रामीण आय का मुख्य स्रोत है। चारे की कीमतें ₹6-7 प्रति किलो से बढ़कर ₹15 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। चारे की कमी के चलते पशुपालकों को अपनी भेड़-बकरियों को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Perspective)
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस स्थिति से रूरल डिमांड प्रभावित हो सकती है। फर्टिलाइजर और सीड्स बनाने वाली कंपनियों के सेल्स पर असर पड़ सकता है, वहीं डेयरी और एफएमसीजी सेक्टर के लिए भी यह चुनौतीपूर्ण समय है। यदि फसल का उत्पादन गिरता है और चारे की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो क्षेत्रीय खाद्य महंगाई (Food Inflation) में तेजी देखने को मिल सकती है।
वर्तमान में राज्य में सूखा घोषित करने को लेकर राजनीतिक खींचतान भी चल रही है। पंचायत चुनाव के चलते राहत पैकेज पर निर्णय रुका हुआ है, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
