पंजाब सरकार ने 2026 खरीफ सीजन के लिए **₹26.31 करोड़** का एक्शन प्लान तैयार किया है। 2023 से पराली जलाने की घटनाओं में **86%** की भारी गिरावट के बाद, अब सरकार **18.81 मिलियन टन** धान के अवशेषों के प्रबंधन पर जोर दे रही है।
पंजाब सरकार ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को 2026 खरीफ सीजन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना सौंपी है। राज्य का लक्ष्य 30 लाख हेक्टेयर भूमि से निकलने वाले 18.81 मिलियन टन धान के अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करना है। यह कदम 'इमरजेंसी कंटेनमेंट' से हटकर अब किसानों के व्यवहार और आधुनिक तकनीक को अपनाने पर केंद्रित है।
रणनीति के मुख्य बिंदु:
राज्य के 23 जिलों के 151 ब्लॉकों में यह नई रणनीति लागू की जाएगी। इस बजट का बड़ा हिस्सा पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन पर खर्च होगा, ताकि किसान खेत में ही या फिर औद्योगिक उपयोग के लिए पराली का सही निपटान कर सकें।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह नीति सीधे तौर पर कृषि उपकरण उद्योग (Agricultural Equipment Industry) के लिए एक बड़ा संकेत है। सरकार के इस फोकस से ट्रैक्टर, बेलर और हैप्पी सीडर बनाने वाली कंपनियों की डिमांड में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही, बायोमास एनर्जी सेक्टर भी इस पर अपनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि धान का पुआल ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
चुनौतियां और जोखिम:
हालांकि, कागजों पर यह प्लान मजबूत है, लेकिन जमीन पर इसका क्रियान्वयन बड़ी चुनौती है। यदि मशीनरी की सप्लाई और लॉजिस्टिक्स में देरी होती है, तो सप्लाई चेन में अड़चनें आ सकती हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि जमीनी स्तर पर मशीनरी का वितरण और किसानों द्वारा नई तकनीक का उपयोग कितनी तेजी से हो रहा है।
