पंजाब में आज से धान की सरकारी खरीद शुरू हो गई है, लेकिन राज्य एक बड़े लॉजिस्टिकल संकट से जूझ रहा है। गोदामों में पहले से ही क्षमता से करीब **90 लाख टन** ज्यादा अनाज भरा हुआ है। खेती का **92%** रकबा धान की फसल के नीचे होने से न केवल पानी का स्तर गिरा है, बल्कि अब फसल को रखने के लिए जगह मिलना भी मुश्किल हो गया है।
पंजाब में आज, 1 अक्टूबर 2026 से धान का प्रोक्योरमेंट सीजन शुरू हो गया है, लेकिन नए अनाज को रखने के लिए राज्य के पास जगह ही नहीं है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, गोदामों की क्षमता करीब 182 लाख टन है, जबकि वहां पहले से ही 270 लाख टन से ज्यादा अनाज स्टॉक में पड़ा है। पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन का कहना है कि अगर कम से कम 50 लाख टन अनाज को जल्द खाली नहीं किया गया, तो मंडी में आने वाली नई फसल के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
राइस मोनोकल्चर की भारी कीमत
राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से राइस-व्हीट साइकिल पर टिकी है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव बढ़ रहा है। धान की खेती के कारण भूजल दोहन दर 152% तक पहुंच गई है, और राज्य के 76% से ज्यादा ब्लॉक 'ओवर-एक्सप्लॉइटेड' कैटेगरी में हैं। पानी का स्तर नीचे जाने से ट्यूबल गहरे करने पड़ रहे हैं, जिससे किसानों की खेती की लागत बढ़ गई है और मुनाफा कम होता जा रहा है।
MSP का जाल और फसल विविधीकरण की चुनौती
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की नीति ने किसानों को धान की खेती तक ही सीमित कर दिया है। चूंकि धान और गेहूं के लिए पूरी वैल्यू चेन और प्रोक्योरमेंट सिस्टम तैयार है, इसलिए किसान दूसरी फसलों की ओर नहीं बढ़ पा रहे। बिना सही स्टोरेज और प्रोसेसिंग सुविधा के अन्य फसलों में जोखिम ज्यादा है।
निवेशकों और बाजार पर असर
यह संकट एग्रीकल्चरल लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए एक चेतावनी है। अगर पुराने स्टॉक को जल्द नहीं हटाया गया, तो सप्लाई चेन में देरी हो सकती है, जिसका असर इन कंपनियों के कामकाज पर पड़ना तय है। निवेशकों के लिए अगले कुछ हफ्तों का सरकारी हस्तक्षेप और स्टॉक खाली करने की गति पर नजर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही आने वाले हार्वेस्ट सीजन की दिशा तय करेगी।
