पोल्ट्री की कीमतें गिरीं, श्रावण के कारण मांग में कमी; फीड की ऊंची लागत ने मार्जिन पर कसा शिकंजा

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AuthorAditya Rao|Published at:
पोल्ट्री की कीमतें गिरीं, श्रावण के कारण मांग में कमी; फीड की ऊंची लागत ने मार्जिन पर कसा शिकंजा

श्रावण महीने में मांग में आई कमी के चलते पोल्ट्री (मुर्गा और अंडा) की कीमतें जुलाई के मध्य से कुछ नरम पड़ी हैं। खुदरा बाजार में दाम भले ही गिरे हों, लेकिन फीड की लागत में **40%** से **60%** की भारी बढ़ोतरी से पोल्ट्री फार्मर मुश्किल में हैं। घटते मुनाफे को देखते हुए इंडस्ट्री ने प्रोडक्शन कट जैसे कदम उठाए हैं।

पोल्ट्री की कीमतों में गिरावट, पर किसानों की बढ़ी मुश्किलें

भारत में पोल्ट्री उत्पादों, जैसे अंडा और चिकन, की कीमतों में जुलाई के मध्य से आई गिरावट ने आम उपभोक्ताओं को तो थोड़ी राहत दी है। इसकी मुख्य वजह श्रावण का पवित्र महीना है, जिस दौरान बहुत से लोग मांसाहार से परहेज करते हैं, जिससे मांग में गिरावट आती है।

लेकिन, इस गिरावट के पीछे पोल्ट्री फार्मर्स के लिए एक बड़ी चुनौती छिपी है। उत्पादन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी के चलते उनके मुनाफे का मार्जिन (Profit Margin) बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। नामक्कल जैसे प्रमुख पोल्ट्री हब में, जहां जुलाई के मध्य में अंडे ₹6.80 तक बिक रहे थे, वहीं हाल के हफ्तों में दाम घटकर ₹4.85 से ₹5.80 के बीच आ गए हैं।

फीड की महंगाई ने बिगाड़ा खेल

पोल्ट्री फार्मर्स की परेशानी की सबसे बड़ी वजह फीड (पशु आहार) की बढ़ती कीमतें हैं। मक्का (Maize) और सोयाबीन मील (Soybean Meal) जैसे मुख्य पोषक तत्वों से बना फीड, अंडे या चूजे के उत्पादन की कुल लागत का लगभग 65-70% होता है। पिछले एक साल में इन फीड सामग्री की कीमतों में 40% से 60% तक की भारी उछाल आई है। इस महंगाई ने किसानों के लिए मुनाफा कमाना बेहद मुश्किल बना दिया है, भले ही अंडे और चिकन की खुदरा कीमतें पहले ज्यादा रही हों।

प्रोडक्शन कट और आगे की राह

इन नुकसानों से निपटने और सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए, जून 2026 में पोल्ट्री इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ियों और कोऑपरेटिव्स ने उत्पादन में 25% की कटौती का फैसला किया था। इसका मकसद सप्लाई को कम करके कीमतों को और गिरने से रोकना था।

हालांकि, प्रोडक्शन एडजस्टमेंट के बावजूद, यह सेक्टर मांग में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील है। आने वाले हफ्ते, खासकर तमिल कैलेंडर के अनुसार पुरत्तासी (Purattasi) जैसे संयम के महीनों में, कुछ क्षेत्रों में मांग कम रहने की उम्मीद है।

भविष्य में, पोल्ट्री सेक्टर की स्थिरता काफी हद तक मक्का और सोयाबीन मील जैसी जरूरी फीड सामग्री की उपलब्धता और कीमतों पर निर्भर करेगी। फीड की कीमतों में नरमी या त्योहारी सीजन के बाद उपभोक्ता मांग में बड़ी रिकवरी के बिना, किसानों को कम मार्जिन के साथ ही काम चलाना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.