PepsiCo Foundation ने भारत में 'PRAGATI' नाम से एक बड़ा कृषि कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद **20,000** कृषि उद्यमियों (Agri-Entrepreneurs) को सशक्त बनाना और **20 लाख** किसानों की मदद करना है। इस पहल से फसल की पैदावार **20%** तक बढ़ने और किसानों की आय में कम से कम **30%** की वृद्धि होने की उम्मीद है।
20,000 कृषि उद्यमियों और 20 लाख किसानों का सशक्तिकरण
PepsiCo Foundation की यह नई पहल 'PRAGATI' देश के कई प्रमुख राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान में लागू की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतिम-मील (last-mile) सेवा वितरण और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करके एक मजबूत खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (food supply chain) का निर्माण करना है।
सिद्ध मॉडल से पैदावार और आय में वृद्धि
यह कार्यक्रम मौजूदा कृषि-उद्यमिता मॉडल पर आधारित है, जिसने पहले ही 26,000 उद्यमियों के माध्यम से 2.6 मिलियन से अधिक किसानों का समर्थन किया है। 'PRAGATI' के तहत, धान, मक्का और आलू जैसी मुख्य फसलों की पैदावार में 15% से 20% की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, भाग लेने वाले किसानों की आय में न्यूनतम 30% की वृद्धि का अनुमान है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, 20% किसानों कोregenerative agriculture (पुनर्योजी कृषि) अपनाने और आय के विविध स्रोत बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
मजबूत साझेदारी और वित्तीय साक्षरता
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठन साथ आए हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, IDH, Heifer International, एनवायर्नमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप एकेडमी, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर फाउंडेशन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन (SAFIA), और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) शामिल हैं। तकनीकी खेती के ज्ञान के अलावा, 'PRAGATI' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का उद्देश्य कम से कम 50% किसानों को औपचारिक वित्तीय प्रणालियों तक बेहतर पहुंच और वित्तीय साक्षरता प्रदान करना है।
निवेशकों के लिए मायने
बाजार विश्लेषकों और निवेशकों के लिए, यह कदम भारत में अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की PepsiCo की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। टिकाऊ कृषि और किसान उत्पादकता में निवेश करके, कंपनी आलू जैसी महत्वपूर्ण कमोडिटीज (commodities) के लिए आपूर्ति-पक्ष की अस्थिरता को कम करने का लक्ष्य रखती है, जो उनके स्नैक व्यवसाय के लिए आवश्यक हैं। हालांकि इस तरह की सामाजिक पहल से तत्काल राजस्व (revenue) नहीं मिलता है, लेकिन यह भारतीय बाजार में कच्चे माल की दीर्घकालिक उपलब्धता और नियामक सद्भावना (regulatory goodwill) सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निवेशकों को इन साझेदारियों के विकास पर नजर रखनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि क्या फसल की पैदावार में अनुमानित वृद्धि भविष्य में कंपनी के लिए खरीद लागत को स्थिर करने में मदद करती है।
