कश्मीर के Patalbagh में केसर की प्रीमियम फसल बर्बादी की कगार पर है। साल 2022 में बने एक लैंडफिल की वजह से चूहों का आतंक बढ़ गया है, जिससे **120 हेक्टेयर** जमीन प्रभावित है और किसान अपनी पारंपरिक खेती छोड़ने को मजबूर हैं।
केसर उत्पादन के लिए मशहूर पंपोर के Patalbagh इलाके में इन दिनों गंभीर कृषि संकट छाया हुआ है। साल 2022 में बनाए गए 3 हेक्टेयर के म्युनिसिपल लैंडफिल ने खेती को पूरी तरह तबाह कर दिया है। यह डंपिंग साइट चूहों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बन गई है, जो केसर के पौधों की जड़ों (corms) को फूल आने से पहले ही नष्ट कर रहे हैं।
किसानों की आर्थिक कमर टूटी
फसल बर्बाद होने के डर से करीब 20% किसानों ने केसर की खेती छोड़कर सेब जैसे विकल्प अपनाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, लैंडफिल से आने वाले कीड़ों और पक्षियों के कारण सेब के बाग भी सुरक्षित नहीं हैं। कुल मिलाकर 120 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित है, जिससे इस क्षेत्र की GI-टैग वाली प्रीमियम उपज पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
कानूनी दांव-पेच और पर्यावरण का खतरा
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति ने इस लैंडफिल को 'अवैध' घोषित कर दिया, जबकि स्थानीय निकाय इसे सरकारी जमीन का आवंटन बता रहे हैं। इसके चलते सुधार के काम ठप पड़े हैं। स्थानीय लोग अब मिट्टी और भूजल के दूषित होने (leachate contamination) को लेकर भी डरे हुए हैं।
आगे की राह
Jammu and Kashmir RTI Movement अब इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाने की तैयारी कर रहा है। यदि लैंडफिल को नहीं हटाया गया, तो यह इलाका अपनी केसर उत्पादन की विशिष्ट पहचान खो सकता है, जिससे प्रीमियम केसर की सप्लाई पर बुरा असर पड़ेगा।
